-सेक्टर-4 में चल रहा था अवैध कॉल सेंटर, कोतवाली फेज वन पुलिस ने किया खुलासा
-3 हजार में ऑनलाइन जॉब प्लेटफार्म से खरीदा था डाटा, युवतियों को पूछताछ के बाद छोड़ा
-मौके से 11 कीपैड फोन, एक स्मार्ट फोन, सात मोहर, चार नियुक्ति पत्र, चार मॉनीटर बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। ऑनलाइन जॉब प्लेटफार्म से तीन हजार रुपये में बेरोजगार युवक-युवतियों का डाटा खरीदकर 150 से अधिक लोगों से ठगी करने वाले अवैध कॉल सेंटर का पुलिस ने खुलासा किया है। कोतवाली फेज वन पुलिस ने रेड कर शुक्रवार को संचालक समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 11 कीपैड फोन, एक स्मार्ट फोन, सात मोहर, चार नियुक्ति पत्र, चार मॉनीटर, चार सीपीयू, चार कीबोर्ड, चार माउस और 34 स्क्रीनशॉट बरामद हुए हैं। पुलिस इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों के बारे में पता लगा रही है।
नोएडा जोन के डीसीपी यमुना प्रसाद ने बताया कि कोतवाली फेज वन पुलिस ने एक इनपुट पर सेक्टर-4 स्थित एक अवैध कॉल सेंटर में रेड की। जांच में पता चला कि इस कॉल सेंटर से बेरोजगार युवाओं से संपर्क किया जाता था और उनसे नौकरी का झांसा देकर पहले साढ़े नौ सौ रुपये लेकर आवेदन कराए जाते थे। इसके बाद अन्य चार्ज के नाम पर 50 हजार रुपये की वसूली की जाती थी। पुलिस ने वहां से मेरठ निवासी अनुज कुमार और उसके साथी शामली निवासी रोमेश मलिक को गिरफ्तार किया। अनुज ठगी के कॉल सेंटर का मुख्य संचालक है और रोमेश सहयोगी है। दोनों वर्तमान में दिल्ली के न्यू अशोकनगर में रह रहे हैं। जिस समय पुलिस ने कार्रवाई की, वहां पर चार युवतियां बेरोजगारों को कॉल करने में व्यस्त थीं। उन्हें नहीं पता था कि अनुज और रोमेश उनसे ठगी करवा रहे हैं। सभी युवतियों को दोनों ने इसी माह ही नौकरी पर रखा था। उन्हें 12 से 15 हजार रुपये सैलरी देने की बात आरोपियों ने कही थी। वहीं अलग से कमीशन देने की भी बात कही गई थी। पुलिस ने युवतियों से पूछताछ के बाद नोटिस देकर छोड़ दिया। पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क कई शहरों में हैं और कई लोग इनसे जुड़े हुए हैं। पुलिस इनके नेटवर्क का पता लगा रही है।
ऐसे चलता था ठगी कॉल सेंटर
पुलिस पूछताछ में पता चला कि कॉल सेंटर संचालक फाउंड इट से लेकर अन्य जॉब वेबसाइट से बेरोजगार युवक-युवतियों का डाटा खरीदता था। इन लोगों ने हाल के महीने में 3 हजार रुपये में डाटा खरीदा था। इसके बाद इन लोगों को अवैध कॉल सेंटर से फोन कराया जाता था। कॉल कर वह खुद को नौकरी डॉट कॉम का कर्मचारी बताकर युवतियां संपर्क करती थीं और नौकरी लगवाने का झांसा देते थे। इसके बाद बेरोजगार युवकों से पंजीयन शुल्क के तौर पर सबसे पहले 950 रुपये लिए जाते थे। इसके बाद दस्तावेजों का सत्यापन, फाइल चार्ज और एनओसी के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की जाती थी। युवकों को बताया जाता था कि यह रकम उनसे इसलिए ली जा रही है, ताकि कंपनी एक साल का अनुबंध कर सके। एक साल बाद सारा पैसा कंपनी ब्याज समेत वापस भी कर देगी।
दस साल से सक्रिय, पहले हैदराबाद में भी खोला था कॉल सेंटर
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बताया कि ये लोग पिछले दस साल से इस तरह के काम में जुड़े हैं। आरोपियों ने वर्ष 2017 में हैदराबाद में भी कॉल सेंटर खोला था। आरोपी अपनी फर्जी कंपनी में कॉल करने के लिए सिर्फ महिला कर्मचारी को एक माह के लिए हायर करते थे। एक माह के बाद उनको नौकरी से निकाल देते थे, जिससे किसी को उनके काम के बारे में जानकारी नहीं हो पाती थी।
बीकॉम है अनुज और 12वीं पास रोमेश
एडीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि अनुज बी कॉम पास है और रोमेश 12वीं पास है। दोनों कंप्यूटर के भी जानकार हैं। सेक्टर-4 स्थित चार मंजिला इमारत में जहां अवैध कॉल सेंटर चल रहा था। उसका प्रति माह का किराया 40 हजार है। ये लोग इस दफ्तर को कुछ दिन बाद बंद करने वाले थे, लेकिन पुलिस ने इससे पहले ही पर्दाफाश करते हुए दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। पुलिस को इनके मोबाइल से कई लोगों के बारे में जानकारी मिली है। उन लोगों का पुलिस सत्यापन कराएगी।
दूर दराज के लोगों से करते थे संपर्क
इनके पास जो डाटा रहता था। इनमें से ये लोग नोएडा से दूर के शहरों व दक्षिण के लोगों से संपर्क करते थे। दक्षिण के राज्यों से लेकर पूर्वोत्तर के युवक युवतियों से भी बातचीत करते थे। ताकि जब ये लोग उनसे ठगी कर लें तो शिकायत करने नोएडा आने में सोचना पड़े। इस कारण दूर के लोगों से संपर्क करते थे।