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बिना जांचे चेक से भुगतान के मामले में बैंक को रकम लौटाने के आदेश

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बिना जांचे चेक से भुगतान के मामले में बैंक को रकम लौटाने के आदेश
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ग्रेटर नोएडा। सही से जांचे बिना चेक से भुगतान के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बैंक को सेवा में कमी का दोषी पाया है। आयोग ने पीड़ित को 30 दिन के भीतर उसके खाते से दिए गए 1.5 लाख रुपये 6 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने के आदेश बैंक को दिए हैं। 1000 रुपये वाद व्यय के रूप में भी देने को कहा है।
इस मामले में नोएडा के शिव विहार सिलारपुर निवासी परमजीत सिंह ने आयोग में वाद दायर किया था। परमजीत सिंह के अनुसार उन्होंने ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की बरौला शाखा में खाता खुलवाया था। बैंक की ओर से चेक बुक उनके पते पर भेजी गई थी। आरोप है कि चेक बुक उन्हें न देकर किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दी गई। उस व्यक्ति ने चेक के माध्यम से उनके खाते से 12 जून 2016 को 1.5 लाख रुपये निकाल लिए। आरोप है कि बैंक कर्मियों ने बिना हस्ताक्षर जांचे संबंधित व्यक्ति को उनके खाते से भुगतान कर दिया। मोबाइल पर भुगतान संबंधी मेसेज प्राप्त होने पर परमजीत ने तुरंत कस्टमर केयर और बैंक को सूचित किया। नोएडा के सेक्टर-49 थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया, लेकिन मामले का निस्तारण नहीं किया गया।
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इसके बाद उन्होंने आयोग की शरण ली। 1.5 लाख रुपये 24 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने, मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए एक लाख और वाद व्यय के रूप में 50 हजार रुपये दिलाने की गुहार लगाई। आयोग में सुनवाई के दौरान बैंक ने नियमानुसार भुगतान की बात कही। जिस व्यक्ति को भुगतान किया गया, आईडी के रूप में उससे ड्राइविंग लाइसेंस की प्रति लेने की बात बताई। सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि जब परिवादी के पास चेक बुक नहीं थी तो वह चेक से पैसे कैसे निकाल सकता है। फोरेंसिक लैब आगरा से आई रिपोर्ट से पता चला कि चेक पर हस्ताक्षर परम जीत के नहीं थे। आयोग ने कहा कि परमजीत की शिकायत पर कार्रवाई करना बैंक का दायित्व था। बैंक ने चेक का भुगतान करते समय सावधानी नहीं बरती। चेक पेश करने वाले की जो आईडी ली गई, वह भी स्पष्ट नहीं थी। आयोग ने माना कि उपभोक्ता की सेवा में कमी की गई है।
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