बदायूं। रोजगार पाने के लिए बेरोजगार लगातार उद्योग विभाग में आवेदन कर रहे हैं। बैंकों की ढिलाई से 750 फाइलें अब भी भिन्न-भिन्न कारणों से अटकी हुईं हैं। वहीं 2257 युवाओं की फाइलें बैंकों ने बिना कारण बताए ही निरस्त कर दी हैं। इससे उद्योग विभाग को जो लक्ष्य मिला है वह पूरा नहीं हो पा रहा है, वहीं जिला 63वें स्थान पर पहुंच गया है। 1916 में से मात्र 773 युवाओं को ही रोजगार करने के लिए लोन स्वीकृत हो सका है।
हर महीने उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक डीएम की अध्यक्षा में संपन्न होती है। यहां बैंक के अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं कि युवाओं को अधिक से अधिक लोन दिया जाए, लेकिन बैंकों के मैनेजर इन बेरोजगारों से भी कमीशन चाहते हैं। जो कमीशन नहीं देते, उनकी फाइलें बिना कारण बताए ही निरस्त कर दी जातीं हैं। इससे युवाओं को विभाग से लेकर बैंकाें के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2257 युवाओं की ऋण की फाइलें बैंकों ने निरस्त कर दी हैं, जबकि 750 युवाओं की फाइलों को बैंकों ने दबा लिया है, जिससे उनको लोन नहीं मिल पा रहा है। तीन योजनाओं के तहत जिले के 1916 युवाओं काे स्वरोजगार से जोड़ने के लिए उद्योग विभाग को 89.51 करोड़ रुपये का ऋण देने का लक्ष्य मिला है।
विभाग अपना लक्ष्य पूरा करने को लगातार आवेदनों को पास करके बैंकों को भेज रहा है, लेकिन बैंक कर्मचारी व अधिकारी की करतूतों से 1916 में से मात्र 773 युवाओं को ही रोजगार करने को लोन स्वीकृत हो सका है।
बैंक जांच पड़ताल करके युवाओं का लोन स्वीकृत कर दें तो लक्ष्य पूरा हो सके। बैंकों की लेटलतीफी के चलते लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। प्रदेश में जिले का 63वां स्थान है। जिला प्रशासन को भी बैंकों की कार्यप्रणाली के बारे में अवगत कराया गया है। हर हाल में लक्ष्य को पूरा करना है। -अशोक उपाध्याय, उपायुक्त उद्योग