नोएडा। ओखला पक्षी विहार में मंगलवार को बर्ड फेस्टिवल मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वन एवं पर्यावरण मंत्री दारा सिंह चौहान के अलावा सांसद महेश शर्मा, विधायक धीरेंद्र सिंह और विधायक तेजपाल नागर मौजूद रहे। फेस्टिवल की शुरुआत श्याम सिंह स्मारक कॉलेज के एनसीसी कैडेट की परेड और पक्षियों से जुड़ी विभिन्न प्रस्तुतियों से हुई।
चौहान ने कहा कि ओखला पक्षी विहार में विकास की असीम संभावनाएं हैं। वॉटर स्पोर्ट्स सहित इसकी बेहतरी के लिए कई परियोजनाओं पर काम करेंगे। इससे पहले वनमंत्री ने यहां नई कैंटीन, मीटिंग हॉल, रेंज ऑफिसर का नया ऑफिस सोलर पैनल का उद्घाटन किया। मंत्री, सांसद और विधायकों ने आयोजन स्थल पर पौधरोपण भी किया। वेटलैंड और वॉटर की थीम पर आधारित कार्यक्रम में वन विभाग ने जिले सहित प्रदेश में पक्षियों एवं पर्यावरण से जुड़े स्थानों और उनकी विशेषताओं का वर्णन किया।
वहीं, डीपीएस स्कूल से आए संगीत के शिक्षकों ने संगीतमय प्रस्तुतियों से कार्यक्रम का आकर्षण बढ़ाया। पक्षी विहार को आकर्षण ढंग से सजाया गया था। जगह-जगह बर्ड वॉचर के खड़े होने और सेल्फी आदि के लिए आकर्षक स्पॉट बनाए गए। साथ ही पक्षियों, पर्यावरण, फोटोग्राफी के संसाधन, आयुर्वेदिक दवाएं आदि से जुड़े स्टॉल लगाए गए। वनमंत्री ने भ्रमण कर उनकी विशेषताएं जानी। वनमंत्री ने स्वरचित पुस्तकों का भी विमोचन किया। इसके साथ ही पक्षी प्रेमियों की जानकारी बढ़ाने और पक्षियों के दीदार के लिए खास व्यवस्थाएं की गईं।
सांसद डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजन और आगामी दिनों में बढ़ने वाली सुविधाओं से देश ही नहीं दुनिया के पर्यटक नोएडा पहुंचेंगे। विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा कि अपनी आदतों से प्रकृति को बिगाड़ा है, हमें ही इसके संरक्षण के लिए आगे आना होगा। विधायक तेजपाल नागर ने कहा कि इको टूरिज्म के क्षेत्र में विकास हो रहा है और हम लगातार आगे बढ़ेंगे।
पर्यावरण सुरक्षा का दिया आश्वासन
वनमंत्री नोएडा एयरपोर्ट के निर्माण से होने वाले पर्यावरण पर प्रभाव और पक्षी विहार में विकास मॉडल से जुड़े कई सवालों पर घिरे नजर आए। उन्होंने इस संबंध में जानकारी इकट्ठा कर पर्यावरण संरक्षण करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में एयरपोर्ट निर्माण के दौरान पेड़ कटने, इस संबंध में पर्यावरण संरक्षण संबंधी रिपोर्ट समय से जमा न होने, धनौरी वेटलैंड में कुछ खास प्रजातियों की संख्या घटने जैसे मुद्दों पर कई सवाल उठे। इसके जवाब में आधी-अधूरी तैयारियों ने वनमंत्री की मुश्किलें बढ़ा दीं। उन्होंने संबंधित सवालों पर विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेने और जेवर और धनौरी जाकर यथास्थिति जांचने की बात कही।