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दो मेडिकल कॉलेजों के अधिकारी भी संदेह के घेरे में

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नोएडा। सरकारी कॉलेजों में एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी के खुलासे ने प्रयागराज व बांदा के मेडिकल कॉलेजों के अफसरों को भी परेशानी में डाल दिया है। इन कॉलेजों के दो चपरासियों की मिलीभगत से ही पीड़ितों को झांसा दिया जाता था। पुलिस के अनुसार इन मेडिकल कॉलेजों के कुछ अफसर भी संदेह के घेरे में हैं। उनकी भी जांच की जाएगी। वहीं अब तक की जांच में पता चला है कि आरोपियों को जब पुलिस की पड़ताल शुरू होने की भनक लगी तो उन्होंने साक्ष्य मिटाने के लिए दो लैपटॉप जला दिए थे।
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इस मामले में नोएडा पुलिस के पास अभी तक 15 लोगों की शिकायतें आई हैं। पीड़ितों से 25-25 लाख रुपये तक लेने का पता चला है। इस गिरोह में 11 आरोपी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार प्रयागराज और बांदा मेडिकल कॉलेज के दो चपरासियों की मदद से आरोपी ठगी करते थे। दोनों चपरासी ऑफिस में डीन व अन्य अधिकारी बनकर पीड़ितों से बात करते थे। पुलिस इन चपरासियों के अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लाने की योजना बना रही है। पुलिस अधिकारियों ने हर आरोपी की कुंडली खंगालकर उनसे मिलने वाले लोगों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार गिरोह में शामिल आरोपी राज विक्रम, सचिन और दोनों चपरासी का रहने का स्टाइल भी लग्जरी हो गया था। इस गिरोह ने दिल्ली में भी ठगी को की थी। पुलिस जांच शुरू होने पर आरोपियों को जब लगा कि वे फंसने वाले हैं तो साक्ष्य मिटाने शुरू कर दिए। इसी के तहत जिन दो लैपटॉप में रिकॉर्ड दर्ज था, उन्हें जला दिया गया।
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किराए पर मंगाते थे महंगी कारें
लोगों को जाल में फंसाने के लिए आरोपी पूरा रौब दिखाते थे। खुद को बड़े अधिकारी दर्शाने के लिए किराए पर महंगी कारें मंगाते थे। मेडिकल कॉलेजों के चपरासियों सहित कुछ अन्य लोगों से मिलीभगत कर पीड़ितों को वहां घुमाते थे।
इसलिए आ जाते थे झांसे में
जानकारी के अनुसार निजी विश्वविद्यालय या मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिला कराने पर एक से सवा करोड़ रुपये का खर्च आता है। गिरोह से जुड़े आरोपी सरकारी कॉलेजों में दाखिला दिलाने की एवज में 25 लाख रुपये की मांग करते थे। अगले साल का कोई खर्चा नहीं बताया जाता था। ऐसे में पीड़ित आसानी से आरोपियों के झांसे में आ जाते थे।
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