-प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 4 मॉनिटरिंग स्टेशन 8 कर दिए
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। इस साल प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या दोगुनी कर दी है। 15 अक्तूबर से यहां जांच शुरू हो जाएगी। ऐसे में लगभग हर सेक्टर की वायु गुणवत्ता का पता लगाना आसान होगा। एक स्टेशन से करीब पांच किलोमीटर के दायरे की वायु गुणवत्ता की निगरानी की जा सकेगी।
बता दें कि शहर की खराब सड़कें और सड़कों पर लगने वाला वाहनों का लंबा जाम प्रदूषण कम न होने के प्रमुख कारण हैं। यही वजह है कि नोएडा प्राधिकरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और ट्रैफिक विभाग के संयुक्त प्रयासों के बावजूद शहर में प्रदूषण कम नहीं हो पा रहा है। हालांकि, इस बार एक्यूआई मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या चार से बढ़ाकर आठ कर दी गई है। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि एक स्टेशन करीब पांच किलोमीटर के दायरे की वायु गुणवत्ता का हाल बता सकेगा।
हर साल एक अक्तूबर से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) लागू हो जाता है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाए गए नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस बार सितंबर माह से ही प्रदूषण बढ़ने लगा है। ऐसे में समय से पहले ही ग्रेप लागू करने की योजना बनाई जा सकती है।
सितंबर में दो बार खराब श्रेणी में रही नोएडा की हवा
बता दें कि सर्दियों की हल्की दस्तक शुरू होते ही मौसम में नमी बढ़ जाती है और वायु प्रदूषण भी बढ़ने लगता है। इस बार सितंबर माह में दो बार, 20 और 22 सितंबर को, नोएडा की हवा खराब श्रेणी में रही। वहीं, ग्रेटर नोएडा की वायु गुणवत्ता 8, 9, 10, 21 और 22 सितंबर को खराब श्रेणी में दर्ज हुई थी।
पुराने चार जांच केंद्र और इस साल के नए जांच केंद्र
- सेक्टर-62 — सेक्टर-39 स्थित राजकीय डिग्री कॉलेज के पास
- सेक्टर-125 — सेक्टर-143 स्थित गुलशन इकेबाना सोसाइटी के पास
- सेक्टर-116 — सेक्टर-150 स्थित भगत सिंह पार्क
- सेक्टर-1 — सेक्टर-110 स्थित महर्षि विश्वविद्यालय के पास
निर्माण कार्य स्थलों पर कैमरे लगवा दिए गए हैं, जहां से सीधी निगरानी हो रही है। हॉटस्पॉट और जांच केंद्र भी दोगुने कर दिए गए हैं। इसके बाद भी शहर की खराब सड़कें, सड़कों पर उड़ती धूल और वाहनों का भारी जाम प्रदूषण बढ़ाने के मुख्य कारण बनते जा रहे हैं। -रितेश तिवारी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नोएडा