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Noida News: एकल परिवार से बढ़ीं मानसिक समस्याएं, उबरने में एआई करेगा मदद

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ग्रेटर नोएडा के गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में 51वें राष्ट्रीय वार्षिक चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन
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जीबीयू में आयोजित राष्ट्रीय वार्षिक चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन में बोले हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। दुनिया में तनाव और अवसाद तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे समाज के हर वर्ग पर प्रभाव पड़ रहा है। इसकी कमियों को दूर करना होगा। मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को अब एआई की मदद से भी दूर किया जाएगा। एआई के इस्तेमाल से गांव-गांव पहुंचना आसान हो रहा है। पहले सयुंक्त परिवार हुआ करते थे तो अवसाद जैसी कोई बीमारी नहीं थी। एकल परिवार होने से समस्याएं बढ़ी हैं। ये बातें हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन के शुभारंभ में कहीं।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों को इन बिंदुओं पर भी चिंता करनी चाहिए। एआई नई संभावनाओं का दरवाजा खोल रहा है। एआई से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से सुविधाएं और सुलभ हो रही हैं। वर्तमान में मानसिक स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गया है। एआई की शुरुआत भारत ने कर दी है। देश आने वाले समय में दिशा भी देगा। मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे व्यक्ति के लिए हमें भी आगे आना होगा। उसकी हिम्मत बननी होगी।
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उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणकारी जब भारत आए तो उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय की किताबें चुराईं और जलाईं। हम पहले से ही संपन्न थे। फिर से जल्द पूरे विश्व को भारत दिशा देगा। वह समय अब आने वाला है। उन्होंने कहा कि 33 साल पहले पूरे परिवार का एक्सीडेंट हो गया था। जब बैसाखी से चलता था तो लोगों ने बेचारा कहना शुरू कर दिया लेकिन यदि मानसिक तौर पर कमजोर हो जाता तो यहां आपके सामने खड़ा नहीं होता। उन्होंने मंच से उतरकर भारत चिकित्सा मनोविज्ञान की ट्रेनिंग को शुरू करने वाले डॉ. मनमोहन सहाय को सम्मानित किया।
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1500 लोग ले रहे हिस्सा
कार्यक्रम में देश-विदेश से 1500 लोग हिस्सा ले रहे हैं। जर्मनी, थाईलैंड, श्रीलंका, यूएसए, इटली और यूएई से आए सभी मनोवैज्ञानिकों ने चिकित्सा मनोविज्ञान से एआई से कैसे जोड़ा जाए। इस मौके पर कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, डीन प्रो. माधव गोविंद, आईएसीपी के अध्यक्ष प्रो. जीएस कालोरिया, प्रो. आशा श्रीवास्तव, डॉ. निशी मिश्रा, प्रो. आलोक मिश्रा, सुमित अंकुर सिंह और डॉ. आनंद प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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