अब ड्रोन से पहुंचाए जा सकेंगे जरूरी सामान
नोएडा (सुशील पांडेय)। अब वह दिन दूर नहीं, जब ड्रोन के जरिये मीलों दूर जरूरी सामानों को पहुंचाया जा सकेगा। इससे समय की बचत होगी और लोगों को सुविधा भी मिलेगी। इसके लिए जेवर में एक से दो माह में ड्रोन का परीक्षण (ट्रायल) होगा। चार कंपनियों का संयुक्त प्रयास से ट्रायल में होगा। सॉफ्टवेयर के जरिये ड्रोन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाएगा। नोएडा की कंपनी एओलॉजिक टेक्नोलॉजी ने सॉफ्टवेयर तैयार किया है। देश में पहली बार इस तरह का परीक्षण होगा।
दरअसल, निदेशक, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एक एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) निकाला था। जिसमें उन संभावनाओं का पता लगाना था कि ड्रोन से कितनी दूरी तक और ज्यादा से ज्यादा कितने लोगों को सामान पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए स्पाइस जेट को डीजीसीए से ड्रोन के परीक्षण की अनुमति मिली है। इस काम को करने के लिए स्पाइस जेट ने तीन अन्य कंपनियों के साथ एक सहायता संघ (कंसोर्टियम) बनाया। इसमें सॉफ्टवेयर का काम संभालने के लिए एओलॉजिक टेक्नोलॉजी को रखा गया है। इसके अलावा एक ड्रोन बनाने वाली कंपनी है। वहीं चौथी कंपनी ड्रोन को ट्रैक करेगी। इसमें स्पाइस जेट वित्तीय सहायता के अलावा अपने विमानन (एवियेशन ) के अनुभवों को शामिल करेगा।
20 वर्ग किमी में होगा परीक्षण
अभी जेवर में केवल 20 वर्ग किमी के क्षेत्रफल में ड्रोन के परीक्षण की अनुमति मिली है। इसमें कुछ अन्य अनुमति मिलनी बाकी है। इसके बाद 100 घंटे का परीक्षण शुरू होगा। जेवर में अनुसंधान का काम सुरक्षित होगा क्योंकि यहां फ्लाइंग जोन नहीं है। अब तक केवल 100 फीट तक ही ड्रोन उड़ाने की अनुमति थी। लिहाजा शादी, पार्टियों, मेले के अलावा पुलिस और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए इसका इस्तेमाल होता है। इन सभी कार्यों के लिए रिमोट का इस्तेमाल होता है।
आंखों से हो जाएगा ओझल
यह ड्रोन आंखों से ओझल (बियांड विजुअल लाइन ऑफ साइट) भी हो सकता है। इसे सॉफ्टवेयर के जरिये उड़ाया जाएगा। इसमें सॉफ्टवेयर के जरिये डिलीवरी वाले स्थान के कोऑर्डिनेट्स डाले जाएंगे, जिससे ड्रोन सही जगह तक सामान पहुंचा सके। यहां खेल सिस्टम के कमांड का होगा। रिसर्च के दौरान ड्रोन से सामान उठाकर एक निश्चित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया की जाएगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि ड्रोन से कितना वजनी और कितनी दूर तक सामान भेजा जा सकता है। इस रिसर्च के बाद रिपोर्ट तैयार होगा, जिसे नागर विमानन महानिदेशालय में जमा किया जाएगा।
कोरोना काल में भी हो सकेगा कारगर
कोरोना काल में जरूरी दवाओं लाने और ले जाने के लिए भी इसका इस्तेमाल हो सकेगा, हालांकि अभी इस मामले में कोई बात नहीं हुई है। लेकिन माना जा रहा है कि यह मददगार होगा।
हमें परीक्षण के सॉफ्टवेयर के हिस्से को देखना है। इसमें साफ्टवेयर के माध्यम से लास्ट माइल पर सामान पहुंचाना सुनिश्चित करना होगा। उस क्षेत्र की थ्रीडी मैपिंग भी होगी। हमारी कंपनी परीक्षण होने वाले ड्रोन को सॉफ्टवेयर से जोड़ेगी। - विक्रांत कुमार, निदेशक, एओलॉजिक टेक्नोलॉजी