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Noida News: हर वर्ग की पहली पसंद बनीं उपन्यास की किताबें

Tue, 09 Sep 2025 02:49 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
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बलरामपुर गार्डन में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला में हर उम्र, हर वर्ग के पाठकों के हाथ में इस ब
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लखनऊ। बलरामपुर गार्डन में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला में हर उम्र, हर वर्ग के पाठकों के हाथ में इस बार उपन्यासों की किताबें सबसे ज्यादा देखने को मिल रही हैं। चाहे महिला हों, युवा हों या बुजुर्ग, हर किसी की पहली पसंद उपन्यास बन रही है। सोमवार को पुस्तक मेला परिसर के 120 से अधिक स्टॉलों पर पुस्तक प्रेमियों की भीड़ उमड़ी।
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लखनऊ की रहने वाली साहित्य प्रेमी महिमा बताती हैं कि उपन्यासों में ऐसी बातें होती हैं जो सीधे दिल से जुड़ जाती हैं। ये किताबें सामाजिक व्यवस्था को समझने में मदद करती हैं और पढ़ने में मन भी लगता है। स्टॉल संचालक राकेश सिंह ने बताया कि उनके स्टॉल पर धर्मवीर भारती की गुनाहों के देवता, शिवानी की मृत्युंजय, सुरेंद्र वर्मा की मुझे चांद चाहिए जैसी चर्चित किताबों की सबसे ज्यादा बिक्री हो रही है।

दलित साहित्य की भी खास डिमांड
लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधार्थी जितेंद्र कुमार के अनुसार, पुस्तक मेले में एक बड़ा पाठक वर्ग ऐसा भी है जो दलित साहित्य की ओर आकर्षित है। इनमें भारत में अशोक राज, बौद्ध सभ्यता की खोज, धम्म चक्र, अंबेडकर की रचनाएं और पूना पैक्ट जैसी किताबें खूब पसंद की जा रही हैं। बुक स्टॉल संचालक शिव शंकर ने बताया कि यहां कई किताबें ऐसी हैं जो कहानियों के माध्यम से इतिहास को नए नजरिए से प्रस्तुत करती हैं।
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ख्वाबों का ताना-बाना किताब हिंदी गजलों के लिए शुभ संकेत

सचिवालय में निजी सचिव के पद पर कार्यरत एवं प्रसिद्ध गजलकार रतन कुमार श्रीवास्तव की लिखी पुस्तक ''''ख्वाबों का ताना-बाना'''' के द्वितीय-संस्करण का विमोचन सोमवार को हुआ। वाणी प्रकाशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदिति माहेश्वरी ने बताया कि कम समय में ही पाठकों के बीच इस पुस्तक को इतनी पसंद की गई कि दूसरा संस्करण प्रकाशित करना पड़ा। वाणी प्रकाशन के अधिष्ठाता अतुल माहेश्वरी ने बताया कि ऐसा कभी-कभी होता है, जब किसी रचनाकार की लिखी किताब का दूसरा संस्करण इतने कम समय में निकलना पड़े। यह गौरव की बात है और हिंदी की गजलों के लिए शुभ संकेत है।

बाल उपन्यास ''''सुबह का सपना'''' का लोकार्पण

पुस्तक मेला परिसर में मंजुषा परिषद की अध्यक्ष डॉ. मंजु शुक्ल के बाल उपन्यास ''''सुबह का सपना'''' का लोकार्पण किया गया। बाल उपन्यासकार संजीव जायसवाल ने कहा कि कोरोना में परिवार के आपसी द्वंद्व मानवीय संवेदनाओं और स्वार्थ का लेखिका ने सुंदर व मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया है। कहा कि इस पुस्तक में बालक विशू के माध्यम से अनुशासन एवं बाल मनोविज्ञान समझने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। प्रो. ऊषा सिन्हा ने स्मृति शेष ''''प्रो. सरला शुक्ल स्मृति सम्मान'''' ग्रहण करते हुए उनके साहित्यिक अवदान को याद किया।

बलरामपुर गार्डन में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला में हर उम्र, हर वर्ग के पाठकों के हाथ में इस ब

बलरामपुर गार्डन में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला में हर उम्र, हर वर्ग के पाठकों के हाथ में इस ब

बलरामपुर गार्डन में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला में हर उम्र, हर वर्ग के पाठकों के हाथ में इस ब

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