(सेक्टर-150 हादसा)
- आरोपियों के अधिवक्ताओं ने कहा बिल्डर कंपनी से आरोपी का संबंध नहीं, विवेचक की भूमिका पर उठाए सवाल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शंस कंपनी से कथित रूप से जुड़े मामले में आरोपी निर्मल सिंह के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना ठोस साक्ष्य और आधारभूत तथ्यों के किसी व्यक्ति के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी नहीं किया जा सकता। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लंघन है।
यह आदेश युवराज मेहता के पिता राज कुमार मेहता की शिकायत से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। अदालत ने विवेचक की भूमिका पर भी सवाल उठाए और भविष्य में ठोस तथ्य सामने आने पर ही कार्रवाई की छूट देने की बात कही। प्रकरण में निर्मल सिंह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में मांग की थी कि उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को निरस्त किया जाए। आरोपी पक्ष ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) की वेबसाइट पर उपलब्ध आरओसी डेटा को आधार बनाते हुए अदालत के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए। इन दस्तावेज में वर्ष 2016 से 2022 तक और वर्तमान समय तक कंपनी के निदेशकों की सूची दी गई। जिसमें निर्मल सिंह का नाम कहीं भी दर्ज नहीं है। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि लोटस ग्रीन के निदेशक के रूप में रोहित किशोर, मधु चंद्रा, विनय विनायक अम्बेडक, कल्याण कुमार कांजी, गोपाल सिंह (2016 से 2022 तक) और वर्तमान में मयंक चौहान का नाम दर्ज है। निर्मल सिंह का नाम वर्ष-2016 से लेकर वर्तमान तक किसी भी रिकॉर्ड में नहीं है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका कंपनी से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा।
विवेचक नहीं दे सके संतोषजनक जवाब:
अदालत ने जब विवेचक से पूछा कि निर्मल सिंह कंपनी में किस पद पर थे और किस आधार पर उनकी भूमिका प्रकाश में आई, तो विवेचक स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ रहे। विवेचक ने अदालत के समक्ष यह भी स्वीकार किया कि उन्हें इस संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने आगे साक्ष्य एकत्र करने के लिए 10 दिन का समय मांगा। विवेचक की रिपोर्ट के आधार पर ही अदालत ने 22 जनवरी को एनबीडब्ल्यू जारी किए गए थे। जिनमें निर्मल सिंह को कंपनी का निदेशक बताया गया था।