-नोएडा प्राधिकरण ने की तैयारी, सिर्फ गंगाजल और रैनीवेल से की जाएगी पानी सप्लाई
-महज वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बने रहेंगे नलकूप
-लगातार गिरते जलस्तर को देखते हुए बनाई योजना
-प्रति वर्ष 2.5 से तीन फीट तक गिर रहा वॉटर लेबल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में दिसंबर आखिर तक पानी की सप्लाई सिर्फ गंगाजल और रैनीवेल से प्राधिकरण करेगा। नलकूप से सप्लाई के लिए पानी निकालना बंद कर दिया जाएगा। लगातार गिर रहे भू-गर्भ जल स्तर को रोकने और पानी को बचाने के लिए जीरो डिस्चार्ज सिटी की यह योजना प्राधिकरण ने तैयार की है।
प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि गाजियाबाद की गंग नहर से आने वाले गंगाजल और नौ रैनीवेल से सप्लाई को जरूरी पानी उपलब्ध हो जाएगा। इसके लिए महज पाइप लाइन नेटवर्क दुरुस्त करने की जरूरत है। इस पर काम शुरू कर दिया गया है। अभी 40 से ज्यादा नलकूप से पानी निकाल कर गंगाजल और रैनीवेल के पानी में मिलाकर सप्लाई किया जाता है। फिर नलकूप से पानी निकालना बंद कर दिया जाएगा, कोई समस्या आने पर ही नलकूप से पानी निकाला जाएगा। प्राधिकरण की इस तैयारी से शहर में सप्लाई होने वाली पानी में टीडीएस का स्तर सुधरेगा। नलकूप से निकलने वाले पानी का टीडीएस स्तर बहुत ज्यादा रह रहा है। खासकर एक्सप्रेस-वे किनारे के सेक्टर व 7 एक्स सेक्टरों में में यह समस्या देखने को मिलती है। टीडीएस का स्तर 1500 के ऊपर तक पहुंच रहा है।
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100 रहता है गंगाजल में टीडीएस
शहर में आने वाले गंगाजल में टीडीएस का लेवल 100 रहता है। गंग नहर का यह पानी शोधित होकर नोएडा को मिलता है। नलकूप से अभी करीब 90 एमएलडी पानी प्रतिदिन निकाला जा रहा है। यमुना किनारे लगे रैनीवेल से निकलने वाले पानी में टीडीएस का लेवल 300 तक रहता है। इस तरह जब नलकूप का पानी निकालना बंद कर दिया जाएगा और सिर्फ गंगाजल और रैनीवेल के पानी की सप्लाई होगी तब बढ़े टीडीएस की समस्या से निजात मिलेगी। इसके साथ ही भू-गर्भ जल दोहन और गिर रहा जल स्तर भी रुकेगा। बात अगर गिर रहे जल स्तर पर करें तो शहर में प्रति वर्ष 2.5 से 3 फीट भू-गर्भ जल स्तर गिर रहा है। सबसे तेज जल स्तर छिजारसी से लेकर मोरना और सेक्टर-16 के बीच बसे शहर में गिर रहा है। इसमें पुराने सेक्टर और गांव शामिल हैं। यहां तीन फीट जल स्तर प्रति वर्ष गिर जा रहा है।
भविष्य में जमीन से नहीं निकाला जाएगा पानी
नोएडा प्राधिकरण का दावा शहर को भविष्य में जीरो डिस्चार्ज सिटी बनाने का है। मतलब यह कि जमीन से पानी नहीं निकाला जाएगा। सिर्फ गंगाजल और रैनीवेल से आने वाले पानी से सप्लाई होगी। प्राधिकरण के आंकड़ों पर गौर करें तो अभी 155 सेक्टर और 47 गांव में 415 एमएलडी की है। अभी इसमें गंगाजल 260 एमएलडी, 100 एमएलडी रैनीवेल व बाकी पानी नलकूप से सप्लाई हो रहा है। अब 37.5 क्यूसेक गंगाजल परियोजना पूरी होने के बाद शहर को गंगाजल 330 एमएलडी तक उपलब्ध है। सही कराए गए नौ रैनीवेल से 100 एमएलडी से ज्यादा पानी मिलने लगा है। इस तरह से अगर उपलब्ध पूरा गंगाजल नोएडा लेकर सप्लाई करने लगेगा तो नलकूप से पानी निकालने की जरूरत नहीं होगी।
कोट-
शहर में भू-गर्भ जल का उपयोग शून्य किया जाना है। उपलब्ध गंगाजल और रैनीवेल से पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाएगा। इसके लिए पाइप लाइन नेटवर्क पर कुछ काम किए जाने हैं। दिसंबर में नोएडा को जीरो-डिस्चार्ज सिटी घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है।
- कृष्णा करुणेश, एसीईओ, नोएडा प्राधिकरण।