होमगार्ड को वेतन देने के लिए जो ओरिजिनल मस्टर रोल बनता था। उसे फाड़कर कमांडेंट ऑफिस में ही फर्जी मस्टर रोल बनाया जाता था। इस पर थानाध्यक्ष के फर्जी हस्ताक्षर व मुहरें लगाई जाती थीं।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि एक खास कमांडेंट की तैनाती के दौरान सबसे अधिक अनियमितता बरती गई। पुलिस उस कमांडेंट की भूमिका की भी जांच कर रही है। इसमें एक अहम बात सामने आई है कि देहात क्षेत्र से अधिक शहरी क्षेत्र में तैनाती के दौरान अधिक अनियमितता बरती गई।
अग्निशमन विभाग में ऑनलाइन सिस्टम में भी पकड़ी थी सेंधमारी
नोएडा पुलिस ने सितंबर में अग्निशमन विभाग के ऑनलाइन सिस्टम में सेंधमारी कर एनओसी के नाम पर भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। इसमें एनओसी के नाम पर घूस लेने के आरोपी एफएसओ कुलदीप कुमार और फायर वेंडर अरविंद गुप्ता को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
इसकी जांच में पता चला था कि दोनों आरोपी मिलकर ऑनलाइन सिस्टम में सेंधमारी कर रहे थे। इसके लिए फायर वेंडर खुद व अपने सहयोगियों के नाम पर भवनों, विद्यालयों, अस्पतालों, उद्योगों के लिए एनओसी लेते थे। अग्निशमन विभाग के ऑनलाइन साइट पर जाकर एनओसी के लिए जो फॉर्म भरते थे। उसमें नाम, ई-मेल, मोबाइल नंबर वेंडर का होता था और पता उस संबंधित बिल्डिंग का।
पहले तो एनओसी जारी करने को लेकर बिल्डिंग मालिक से पैसे लेते थे। बाद में अग्निशमन विभाग की तरफ से बिल्डिंग के लिए जो भी अपडेट आता था वह वेंडर के नंबर व ई-मेल पर आता था। फिर वेंडर अग्निशमन अधिकारी के साथ मिलकर बिल्डिंग मालिक से पैसे ऐंठता था। नोएडा पुलिस ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी तो ऑनलाइन सिस्टम को दुरुस्त करने को लेकर बैठकें हुई। शासन स्तर पर यह बात चल रही है कि एनओसी के लिए आवेदन देने वाले अपना आधार नंबर भी देंगे। इससे फर्जीवाड़ारुकेगा।