नोएडा सेक्टर 168 से ली गई तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
आईटी हब, वॉक टू वर्क का कल्चर
सेक्टर-62, 125 से लेकर एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित सेक्टर-135 और 142 में बहुराष्ट्रीय कंपनियों खासकर आईटी कंपनियां तेजी से बढ़ी हैं। इनमें काम करने वाले इंजीनियरों व अन्य के रहने के लिए ठिकाने की मांग भी बढ़ी। यहां आसपास कई ग्रुप हाउसिंग बनीं। लिहाजा कार्य स्थल के नजदीक ही बहुराष्ट्रीय कंपनी के कर्मचारियों को रहने का विकल्प मिल रहा है। इससे हर दिन सुबह-शाम ऑफिस के लिए लंबे सफर और ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।
ज्यादा कीमत में बिकते हैं नोएडा के आवासीय प्लॉट
नोएडा में घर बनाने की मांग का आकलन अगर प्लॉट के लिए प्राधिकरण की योजना से करें तो प्रतिस्पर्धा स्पष्ट दिखती है। प्राधिकरण ई-नीलामी से आवासीय प्लॉट का आवंटन करता है। नवंबर-2024 में आई 25 प्लॉट प्राधिकरण की तरफ से निर्धारित आवंटन दर से 138 प्रतिशत ज्यादा कीमत पर बिके थे। वहीं 2022 से 2025 तक लगातार बढ़ोत्तरी से आवासीय प्लॉट की आवंटन दरें 38 प्रतिशत तक बढ़ी हैं।
नोएडा सेक्टर 168 से ली गई तस्वीर
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ग्रुप हाउसिंग परियोजना लांच कर रहीं दुबई और अमेरिका की कंपनियां : नोएडा में रियल एस्टेट के क्षेत्र में देश के चुनिंदा बिल्डर ग्रुप आए हुए हैं। इसके साथ ही दुबई और अमेरिका की भी कंपनियां फ्लैट बनाने के लिए नोएडा की परियोजनाओं में शामिल हो चुकी हैं। सोसाइटियों में अल्ट्रा लग्जरी फ्लैट की मांग भी कम नहीं है। 15 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले फ्लैटों की बुकिंग भी हो रही है। कम कीमत वाली मध्यम वर्ग के लिए भी फ्लैटों की परियोजनाएं इस क्षेत्र में आ रही हैं।
सुविधाएं जो नोएडा में जीवन आसान बनाती हैं
कनेक्टिविटी- तीन मेट्रो रूट के साथ एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी है। एक तरफ नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेस-वे से आगे एक्सप्रेसवे पकड़ते हुए कोई भी आगरा, लखनऊ तक सीधे जा सकता है। दूसरी तरफ दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे है। स्कूल,अस्पताल, शिक्षा और स्वास्थ्य परिवारों की बुनियादी जरूरतें होती हैं। नोएडा में बड़े अस्पताल व नामी स्कूल व यूनिवर्सिटी हैं। हरियाली भी नोएडा की पहचान बनी हुई है। शहर में छोटे-बड़े 750 पार्क, 300 से ज्यादा बड़ी ग्रीन बेल्ट के साथ सेंट्रल वर्ज व एक्सप्रेसवे, सड़क किनारे किनारे पेड़-पौधे लगे हुए हैं।
नोएडा सेक्टर 110 से ली गई तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
पहले मेरा परिवार दिल्ली में रहता था। नोएडा को देखा इस शहर ने मुझे आकर्षित किया। यहां की चौंड़ी सड़कें, बेहतर कनेक्टिविटी, सेक्टर के पार्क व हरियाली से रहने का अच्छा माहौल मिलता है। मैंने अपना घर नोएडा में बनाया, पिछले कई वर्षों से परिवार के साथ रहता हूं।- इंजीनियर, दिनेश सिंह, सेक्टर-40
पहले मेरा परिवार दिल्ली के द्वारका में रहता था। नोएडा में कॉलेज-यूनिवर्सिटी में बच्चों की पढ़ाई के लिए आना हुआ फिर यहीं के होकर रह गए। हमारी सोसाइटी के पास पार्क, स्कूल, मार्केट व अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं हैं। अब नोएडा के अलावा कोई दूसरा शहर अच्छा नहीं लगता है। - अर्चना चतुर्वेदी, सेक्टर-120
नोएडा के सेक्टरों का कोई तोड़ नहीं है। सड़क पर भले वाहनों की संख्या बढ़ने लगी है। लेकिन अगर आप एक बार सेक्टर के अंदर प्रवेश कर गए फिर सुकून में कोई दखल नहीं होता है। आवासीय सेक्टर ऐसे कहीं और नहीं मिलते। दिल्ली, गाजियाबाद जैसे पुराने शहरों में ऐसे सेक्टर कहीं नहीं हैं। - संदीप सेठ, सेक्टर-40
मैं उत्तराखंड के काशीपुर से नोएडा नौकरी के लिए वर्ष 2000 में आया था। यहां रहने का इरादा नहीं था। नोएडा में अस्पताल, स्कूल, बाजार जैसी सभी सुविधाएं जो विकसित हुई हैं उनसे नजरिया बदला। कई वर्ष बतौर किराएदार रहने के बाद मैंने इस शहर में अपना घर बनाया। - राजेश सिंह, सेक्टर-50
पूरे पश्चिम यूपी ही नहीं दिल्ली-एनसीआर में भी मौजूदा समय में सबसे ज्यादा मांग नोएडा में संपत्तियों की है। यहां पर लोग निवेश से ज्यादा निवास के लिए फ्लैट ले रहे हैं। इसमें आईटी व मल्टीनेशनल कंपनी के कर्मचारी भी हैं और सरकारी सेवा के अधिकारी भी। नोएडा में मौजूदा समय में मांग के अनरूप प्लॉट या फ्लैट की उपलब्धता कम है। हमारे अनुमान के मुताबिक 2020 के बाद पिछले 6 वर्षों में नोएडा में रियल एस्टेट में 50 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है। - दिनेश ग्रुप्ता, अध्यक्ष, क्रेडाई, पश्चिम यूपी।
नोएडा को आगे और भी खूबसूरत बनाने और संवारने की दिशा में काम किया जाएगा। दिल्ली, ग्रेटर नोएडा व गाजियाबाद से आने पर जो प्रवेश स्थल व रास्ते हैं उन पर हरियाली, लाइटिंग को बढ़ाया जाएगा। सेक्टर व गांव की समस्याओं को दूर कराने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण रिहायश का वातावरण और भी बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। - कृष्ण करुणेश, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण।