यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की आहट तेज हो गई है। इस चुनावी उथल-पुथल से पहले ही राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है। इस मद्दोनजर, अमर उजाला की टीम जमीनी हकीकत को टटोलने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रही है। इस बार हमारी टीम ने गौतमबुद्ध नगर में सरकारी योजनाओं के आम जनजीवन पर पड़े प्रभाव और विकास के दावों की असल तस्वीर को समझने का प्रयास किया। इस पड़ताल में स्वास्थ्य सुविधाएं, शहरीय विकास, नवाचार आदि मुद्दों को भी परखा गया।
कितनी बेहतर हुईं स्वस्थ सेवाएं
निदेशक, जिम्स ग्रेटर नोएडा, ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने बताया कि हमने स्क्रैच से शुरू किया है। खुशी है कि हमारे यहां पर पेशेंट की संख्या में पांच से छह गुना बढ़ोतरी हुई है। 2018 से 2025 के मुकाबले में सर्जरी करीब चार गुना हमारे यहां बढ़ गई है। बहुत सारी क्वालिटी ट्रीटमेंट हम लोग कर रहे हैं। हम लोग जॉइंट रिप्लेसमेंट कर रहे हैं। नेफ्रोस्कोपिक सर्जरी कर रहे हैं। इंटेंसिव केयर कर रहे हैं और अधिकतर कोशिश कर रहे हैं कि सारे के सारे इलाज यहां पर उपलब्ध हो जाए। इसके साथ-साथ जो जिम्स का हमारा विजन है वो है पेशेंट केयर, एक्सीलेंस, एकेडमिक्स एंड रिसर्च एंड इनोवेशंस है। गवर्नमेंट का हमारे पास पूरा सपोर्ट है।
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शहरीय विकास और सज्जा पर कितना हुआ काम?
निदेशक उद्यान, आनंद मोहन सिंह ने बताया कि जो जंगल ट्रेल यहां पर बनाया गया है। मैं इसके बारे में आप सभी को यह बताना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश में बहुत-बहुत चीजों में बदलाव आया और इसी तरह से जब उत्तर प्रदेश में बदलाव आया तो नोएडा प्राधिकरण ने भी अपने अंदर बहुत परिवर्तन किए। यहां पर कूड़े का एक पहाड़ रहता था। उस वेस्ट को हम लोगों ने पीपीपी मोड पर सारा वेस्ट एक कंपनी को दे दिया। उस कंपनी ने 7 जोन में पूरे विश्व के जो जानवर हैं, उनकी पूरी ओरिजिनल उसी तरह की प्रतिमाएं बनाईं। जिसको देखने में ऐसा महसूस होता है कि आप अलग-अलग जैसे एशिया के जोन में जाएंगे तो एशिया के जानवर वहां पर हैं। ऑस्ट्रेलिया के जोन में जाएंगे तो वहां पर उस तरह के जानवर दिखेंगे। नोएडा पूरी तरह से आईटी इंडस्ट्री और उद्योगों का शहर है। यहां पर इस तरह का कोई भी पिकनिक स्पॉट नहीं था, जोकि अट्रैक्ट करें। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यह परियोजना लाई गई थी।
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नवाचार के क्षेत्र में कितना बदलाव?
जिम्स ग्रेटर नोएडा, डॉ राहुल सिंह ने बताया कि हम लोग इस वक्त गवर्नमेंट स्टूडियो मेडिकल साइंसेस ग्रेटर नोएडा में हैं और आप इस वक्त मेडिकल इनक्यूबेशन सेंटर में हैं जो इस प्रदेश का पहला मेडिकल इनक्यूबेशन सेंटर है और एक मेडिकल इनोवेशन सेंटर जो अस्पताल में है इस तरह का आप कांसेप्ट अमेरिका में सुनते हैं कि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में है। ये एक ऐसा कल्चर है जहां ये कोशिश होती है कि इस देश में डिवाइसेस बनें। इस देश के लिए डिवाइसेस बनें। एक बड़ा अच्छा प्रयास हमारे यहां हो रहा है। एक स्टार्टअप हैदराबाद का है, वो आए हैं। उन्होंने कहा कि हम गांव की उस महिला तक एआई पहुंचाना चाहते हैं जिनके पास एंड्राइड फोन भी नहीं है। एक नंबर जारी किया है। उन्होंने इसका डेमो भी करके दिखाया।
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