नोएडा प्रशासन द्वारा जोर-शोर से प्रचार कर वैक्सीनेशन ड्राइव चलाई जा रही है। हालांकि नियमों के फेर और अव्यवस्था के कारण कागजों में चमक रही यह ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन योजना सोमवार को जीआईपी मॉल में भी धरातल पर कई चुनौतियों से घिरी रही। सोमवार को जिले में चल रही वैक्सीनेशन ड्राइव की अमर उजाला टीम ने मौके पर जाकर पड़ताल की और वहां अव्यवस्थाओं का मंजर देखने को मिला।
स्वास्थकर्मियों की कमी से लेकर सर्वर डाउन जैसी सिस्टम की खामियों की सूचना ने लोगों को घंटों लाइन में लगकर पसीना बहाने पर मजबूर किया। इतना ही नहीं जब काफी समय इंतजार करने के बाद कार में बैठे व्यक्तियों ने देखा कि कुछ लोग बिना किसी वाहन के आ रहे हैं और उन्हें टीकाकरण में प्राथमिकता दी जा रही है तो उन्होंने सवाल किए। जब सवाल और नाराजगी के बारे में वहां उपस्थिति स्वास्थ्य कर्मी एवं पुलिसकर्मी पूछा गया तो उनके पास इसका कोई उत्तर नहीं था। बस वो अपने काम को टालते हुए नजर आए।
कोई कार से पहुंचा कोई पैदल... ऊहापोह में रहा हर कोई
जल्दबाजी में गौतमबुद्ध नगर प्रशासन ने ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन शुरू करके व्यवस्थाओं को दुरुस्त तो जरूर दिखाने की कोशिश की, लेकिन वैक्सीनेशन के नियम क्या होंगे और एक उचित चैनल में पूरी व्यवस्था कैसे काम करेगी इसमें कोई तालमेल नहीं दिखा। इस वजह से लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। जीआईपी मॉल का गेट नंबर 11 ड्राइव थ्रू के लिए चुना गया अकेला ऐसा स्थान है, जहां बिना पूर्व रजिस्ट्रेशन के कोवाक्सीन की दूसरी डोज लगेगी। ऐसे में यहां सुबह आठ बजे से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई। वैक्सीनेशन सिर्फ कार वालों का होगा या पैदल आने वालों का भी इसे लेकर कोई स्पष्ट नीति नजर नहीं आई।
भीड़ बढ़ती देख मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कार से आने वाले और पैदल आने वाले लोगों की अलग-अलग लाइन लगवा दी। जिसके बाद पैदल वालों को जल्दी वैक्सीन लगते देख कई लोग बीच रोड पर अपनी कारें खड़ी कर पैदल वालों की लाइन में लग गए। इससे न सिर्फ सड़क पर कारों के काफिले की भीड़ दिखी, बल्कि पैदल लगी लाइन के बीच सामाजिक दूरी का नियम भी टूटता नजर आया। भीड़ में खड़े कई लोगों को वैक्सीन की जगह सामाजिक संपर्क से कोरोना संक्रमण न हो, यह डर सताता रहा।
घंटों लाइन में लगे लोगों का स्वास्थ्यकर्मियों पर निकला गुस्सा
चार से छह घंटे लाइन में लगे लोगों का गुस्सा मौके पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों और पुलिसकर्मियों पर उतरा। जीआईपी में कई बार लोगों और स्टाफ के बीच कहासुनी देखने को मिली। टीकाकरण प्रक्रिया में लगे स्टाफ ने सर्वर स्लो होने और सीमित संसाधन होने की बात कह बार बार लोगों से शांत रहने के लिए अपील की। हालांकि डीएलएफ के बाहर पहले से ही रजिस्टर्ड लोगों के ही आने से अपेक्षाकृत शांति नजर आई। डीएलएफ मॉल में टीकाकरण कराने आए लोगों का कहना था कि यहां आने के बाद तो टीकाकरण आसानी से हो गया, लेकिन स्लॉट पाने के लिए पोर्टल पर बहुत जद्दोजहद करनी पड़ी।
बुलानी पड़ी पुलिस
जीआईपी मॉल के गेट नंबर-11 पर कारों की लंबी कतार और तेज धूप से परेशान लोगों का सब्र जब जवाब देने लगा तो उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों पर ही अपना गुस्सा उतारना शुरू कर दिया। लोगों का यह भी कहना था कि इस प्रक्रिया में लगे लोग अपनी पहचान के लोगों को इसका लाभ दे रहे हैं। ऐसे में वहां कई बार सामाजिक दूरी के नियम भी पूरी तरह से ध्वस्त नजर आए। मौके पर लोगों की बढ़ती भीड़ और वाद-विवाद को देखते हुए यहां पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस बल के पहुंचने के बाद भी लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच कई बार वाद-विवाद होता नजर आया।
लोगों से बात:
मैं दिल्ली से हूं। वहां मौलाना आजाद में टीकाकरण स्लाट बुक किया था, लेकिन टीकाकरण हो नहीं पाया। इसलिए सुबह 9 बजे से नोएडा आया हुआ हूं। चार घंटे हो गए यहां भी अब तक टीका नहीं लगा है। - संजीव, जीआईपी मॉल टीकाकरण के लिए पहुंचा व्यक्ति
मैं सुबह 9 बजे से अपनी कार में आया हुआ अपने नंबर का इंतजार कर रहा हूं। एक बज गया मगर अभी तक नंबर नहीं आया। कुछ लोग बाद में आकर पैदल वालों की लाइन में लग गए और उनका टीकाकरण हो गया। बहुत अव्यवस्था है।- दीपक, जीआईपी मॉल टीकाकरण के लिए पहुंचा व्यक्ति
यहां टीके की बारी के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा है। लेकिन पहले से कोविन पोर्टल पर स्लाट लेना जरूरी था। जिसमें काफी वक्त लगता है। - अजय कुमार, डीएलएफ मॉल टीकाकरण के लिए पहुंचा व्यक्ति
शनिवार से कोशिश कर रहे थे, तब जाकर बड़ी मुश्किल से कोविन पोर्टल पर सोमवार का स्लाट मिला है। इस सेंटर पर सिर्फ पहले से रजिस्ट्रर्ड लोगों का टीकाकरण होने से ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा।- अंजली डीएलएफ मॉल टीकाकरण के लिए पहुंची महिला