-फरवरी-2024-025 में आए एक्ट में प्राधिकरण ने किया था आवेदन, नोटिफिकेशन जारी
-विभाग की सभी तरह की आय कर के दायरे से बाहर हुईं
-आयकर से राहत पाने को कई बार कोर्ट गए थे अधिकारी
माई सिटी रिपोर्टर,
नोएडा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने नोएडा प्राधिकरण को स्थानीय प्राधिकरण मान लिया है। इसके साथ ही प्राधिकरण को आयकर अधिनियम 1961 की धारा-10 (46 ए) के तहत आयकर के दायरे से बाहर कर दिया है। यह अधिनियम 2011 में प्रभावी हुआ था। प्राधिकरण को स्थानीय प्राधिकरण मानने और आयकर से छूट देने का नोटिफिकेशन भी सीबीडीटी ने जारी कर दिया है।
इसके पहले भी प्राधिकरण और सीबीडीटी के आयकर को लेकर अलग-अलग मत रहते थे। आयकर की पर राहत के लिए कई बार नोएडा प्राधिकरण कोर्ट की शरण में जा चुका है। कोर्ट में खुद को स्थानीय प्राधिकरण (जन सुविधाएं देने वाली संस्था) बताकर प्राधिकरण ने राहत भी हासिल की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई-2024 में सीबीडीटी के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि नोएडा स्थानीय प्राधिकरण नहीं है। इसलिए प्राधिकरण को आयकर से छूट नहीं दी जा सकती। पहले यह नियम था कि जो प्राधिकरण अपनी आय का 75 प्रतिशत शहर के विकास व जनसुविधाओं पर खर्च करते हैं वह आयकर से छूट का दावा कर सकते थे। वित्तीय वर्ष 2024-2025 के लिए फरवरी 2024 में बदलाव के साथ यह व्यवस्था आई थी कि जन सुविधाओं व विकास से जुड़े काम करने वाले, सरकार से संचालित होने वाले प्राधिकरण स्थानीय प्राधिकरण होने का दावा कर सकते हैं। इस पर जून-2024 में नोएडा प्राधिकरण ने आवेदन भी किया था। इस आवेदन को स्वीकार किया गया और फिर नोटिफिकेशन जारी हुआ है।
2014 से लड़ रहा प्राधिकरण
प्राधिकरण इस मुद्दे पर 2014 से लड़ रहा था। प्राधिकरण का पक्ष है कि भले वह औद्योगिक विकास प्राधिकरण है। लेकिन शहर की सफाई, सड़क, बिजली, सीवर समेत अन्य मुंसिपल कॉरपोरेशन के काम वह पूरे शहर में करवा रहा है। इसलिए उसे स्थानीय प्राधिकरण मानते हुए आयकर में छूट मिलनी चाहिए। प्राधिकरण को सरकार से कोई बजट नहीं मिलता है। प्राधिकरण खुद से लीज रेंट, आवंटन, टीएम से कमाता है और शहर के विकास पर खर्च करता है।