सीईओ का कहना है कि यमुना सिटी फेज-1 में अब विकास दिखने लगा है। अब जरूरी है कि यहां उद्योग क्रियाशील हों, निवेश आए और लोगों के लिए रोजगार सृजित हों। इसमें नोएडा एयरपोर्ट और इसके लिए सीधे कनेक्टिविटी का बहुत महत्व होगा। यही वजह है कि अक्तूबर महीने में ही यमुना एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए जगनपुर अफजलपुर इंटरचेंज को शुरू कराना है।
इसका काम पूरा करने के लिए 15 अक्तूबर का समय एनएचएआई ने कार्यदायी संस्था को दिया हुआ। इसी तरह नोएडा एयरपोर्ट की टीम दिसंबर तक जरूरी एनओसी, अनुमति लेते हुए इंटरनेशनल टर्मिनल का काम पूरा करेगी। योजना यह है कि जनवरी में यहां से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शुरू हो जाएं। इससे विदेशी निवेशकों को सीधे यमुना सिटी आना सुगम हो जाएगा।
सीईओ ने बताया कि यमुना सिटी को नई पहचान देने के लिए धनौरी वैटलेंड पर विकास कार्य शुरू कराए जाने हैं। बिना प्राकृतिक पर्यावास को प्रभावित किए ही इसे बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित किया जाना है। नोएडा एयरपोर्ट से करीब 15 किमी की दूरी पर मौजूद इस वैटलैंड में जहां विदेशी पक्षी हर साल आते हैं। वहीं, राज्यपक्षी सारस का भी इसे घर माना जाता है। इसके साथ ही अलग-अलग सेक्टरों और औद्योगिक पार्कों में अगले छह महीने में करीब 200 उद्योग भी क्रियाशील और हो जाएंगे। मेडिकल डिवाइस पार्क में भी उत्पादन बढ़ेगा, इसका भी औपचारिक लोकार्पण जल्दी होना है।
एजूकेशन हब बनाने के लिए चार विवि आएंगे यमुना सिटी
यमुना सिटी में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिन चार नामचीन संस्थानों को जमीन देने की तैयारी चल रही है, इनमें एमिटी विश्वविद्यालय, लॉयड विश्वविद्यालय, बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय को जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी होनी है। जेवर एयरपोर्ट के नजदीक 500 से 700 एकड़ की ''यूनिवर्सिटी टाउनशिप'' में इनको भूखंड दिए जा सकते हैं। इसके अलावा सेक्टर-22ई में जेबीएम यूनिवर्सिटी और नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज भी अपना कैंपस का निर्माण कर चुके हैं।