- अपर मुख्य सचिव नागरिक उड्डयन दीपक कुमार की डीजीसीए के अधिकारियों के साथ रही नोएडा एयरपोर्ट पर बैठक
- डीजीसीए के अलावा एएआई, बकास, नायल के अधिकारी भी रहे मौजूद
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ ही दिसंबर में कॉमर्शियल फ्लाइट शुरू करने के लिए कवायद तेज हो गई है। यूपी सरकार में अपर मुख्य सचिव नागरिक उड्डयन दीपक कुमार की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को रही उच्चस्तरीय बैठक में यह तय हो गया है कि 30 नवंबर तक एयरोड्रम लाइसेंस मिल जाएगा। इसके लिए 24 नवंबर को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सेफ्टी (बकास) संपूर्ण सेवाओं के लिए सुरक्षा जांच नोएडा एयरपोर्ट पर करेगा। कार्गो सेवा के लिए बकास पहले ही सर्टिफिकेट नोएडा एयरपोर्ट को दे चुका है।
बृहस्पतिवार दोपहर में नोएडा एयरपोर्ट पर रही उच्चस्तरीय बैठक में यमुना प्राधिकरण के अलावा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड-नायल, महानिदेशक नागरिक उड्डयन- डीजीसीए, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) और बकास के अधिकारी भी शामिल रहे। एक अधिकारी ने बताया कि बैठक का उद्देश्य एयरपोर्ट के कॉमर्शियल ऑपरेशन के लिए तैयार होने के लिए जरूरी सभी बिंदुओं पर विमर्श करना था। इस दौरान कुछ मुद्दे उठे जिनका निस्तारण कर दिया गया है। डीजीसीए दो दिन से अपना ट्रायल कर ही रहा है। सुरक्षा से जुड़े जो उपकरण नए आए हैं। उनकी भी टेस्टिंग डीजीसीए और बकास की टीमें कर रही हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा है कि एयरोड्रम लाइसेंस के लिए जो भी औपचारिकताएं हैं। उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्राथमिकता पर पूरा कर लिया जाए।
बैठक में यह तय किया गया कि बकास अपना ट्रायल 24 नवंबर को करेगा। यह ट्रायल सफल रहा तो डीजीसीए एक सप्ताह के अंदर एयरोड्रम लाइसेंस जारी कर देगा। एयरोड्रम लाइसेंस जारी होते ही एयरलाइंस अपनी टिकट बुकिंग जहां शुरू कर पाएंगीं। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय को भी उद्घाटन की तारीख तय करने के लिए संपर्क किया जाएगा। बैठक के दौरान इंडिगो और अकासा एयर के अधिकारी भी मौजूद रहे। उनको भी अपनी तैयारियां तेज करने और उड़ानों को शुरू करने के लिए कहा गया है।
अपर मुख्य सचिव ने देखा एयरपोर्ट पर काम
अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने एयरपोर्ट पर अधिकारियों के साथ निरीक्षण कर काम और उद्घाटन की तैयारियां देखीं। इस दौरान वह डोमेटिस्क और इंटरनेशनल दोनों ही लाउंज पर गए। कार्गो सेवा के लिए भी बन रहे हब के बारे में उन्होंने जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि ऑपरेशन की तैयारियों को चेक करने के लिए लगातार मॉक ट्रायल किए जा रहे हैं। इसमें यात्रियों के रूप में कर्मचारी और उनके परिवार के लोगों को सामान के साथ यहां बुलाया जाता है। इससे बोर्डिंग, डी-बोर्डिंग जैसी प्रक्रिया की उचित तरीके से जांच हो पाती है।
यहां पूरे मिले अपर मुख्य सचिव को काम
रनवे का उपयोग, सुरक्षा क्षेत्रों का अनुपालन, टैक्सीवे, एप्रन, पर्याप्त लाइटिंग, नेविगेशन सिस्टम, मौसम व उड़ान से जुड़ा डेटा का सर्वर के साथ लिंक जैसी तैयारियां पूरी हो गई हैं। सुरक्षा से जुड़े उपकरण भी यहां लग गए हैं। सीआईएसएफ पहले ही एयरपोर्ट की सुरक्षा को संभाल चुकी है।
कैलिब्रेशन टेस्ट में पास हुआ एयरपोर्ट
डीजीसीए ने 31 अक्तूबर और चार नवंबर को फ्लाइट कैलिब्रेशन टेस्ट किया था। इसके लिए विमान लैंडिंग और टेक ऑफ के अलावा रनवे पर लगे उपकरणों की जांच की थी। इस टेस्ट में एयरपोर्ट पास हो चुका है।