ग्रेटर नोएडा (अरविंद सिंह)। नोएडा की तरह आने वाले दिनों में ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण में भी जमीन का अधिग्रहण नहीं होगा, बल्कि लैंड पूल के जरिये ही नए शहरों को बसाने के लिए जमीन ली जाएगी। इसमें जमीन पर किसानों का हक भी बराबरी का होगा। वे अपने हिसाब से जमीन पर खुद भी मॉल-दुकान व उद्योग लगा सकेंगे। अपनी मर्जी से उसे बेच भी सकेंगे। आने वाले दिनों में इन नए शहरों से निवेश भी बढ़ेगा। रिहायश, उद्योग व व्यवसाय के नए विकल्प भी मिलेंगे। रोजगार के लाखाें अवसर पैदा होंगे। इससे जिले के लोगों को फायदा होगा।
हाल ही में नोएडा का विस्तार बुलंदशहर की तरफ करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए किसानों से लैंड पूल करके जमीन ली जाएगी। अब उसी तर्ज पर ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण भी आगे बढ़ रहे हैं। ग्रेनो व यमुना प्राधिकरण आने वाली कुछ परियोजनाओं के लिए 93,662 हेक्टेयर जमीन जुटाने की योजना बना रहे हैं। अधिग्रहण कानून से जमीन लेने पर किसानों को मुआवजा, सात फीसदी आवासीय भूखंड, अस्पताल व स्कूलों किसानों को वरीयता जैसी कई सुविधाएं देनी होती हैं। कई बार प्राधिकरण समय से किसानों को हक नहीं दे पाते तो विवाद भी होता है। वहीं, जब प्राधिकरण उस जमीन को आवंटित कर देते हैं तो आवंटियों को जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाता। इससे आवंटियों को परेशानी होती है। बाद में यही मुद्दे किसान आंदोलन की वजह बनते हैं। ऐसे में प्राधिकरणों ने तय किया है कि प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए लैंड पूल से जमीन ली जाएगी। नए शहरों के बसने से प्राधिकरण और किसानों के साथ ही आम लोगों को भी फायदा होगा। उद्योगों को और जमीन मिल सकेगी।
किसान लगा सकेंगे उद्योग, बना सकेंगे मकान व दुकान
लैंड पूल पॉलिसी के तहत किसानों से जमीन लेकर उसेे विकसित करके आधी जमीन वापस कर दी जाएगी। उस जमीन पर किसान चाहें तो खुद से उद्योग लगा सकेंगे। मॉल, दुकान, कांप्लेक्स बना सकेंगे। रिहायश की भी अनुमति होगी। हालांकि, इसके अलावा कोई और फायदा किसानों को नहीं मिलेगा। आधी जमीन प्राधिकरण की होगी, जिसे वह आवंटित कर सकेंगे।
लैंड पूल के लिए बनी समिति ने भेजा है प्रस्ताव
लैंड पूल से जमीन खरीदने पर नीति तैयार करने के लिए शासन ने तीनों प्राधिकरणों की समिति गठित की थी। समिति ने अपने प्रस्ताव शासन को भेज दिए हैं। तीनों प्राधिकरणों ने इस नीति को अनुकूल माना है। शासन से भी इस पर शीघ्र अनुमति मिलने की उम्मीद है। इसके बाद नई योजनाओं के लिए लैंड पूल से जमीन खरीदी जाएगी।
लैंडपूल पॉलिसी पर कमेटी का प्रस्ताव शासन के पास भेज दिया गया है। लागू होने पर नई परियोजनाओं के लिए इसी पॉलिसी से जमीन खरीदी जाएगी। प्राधिकरणों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह पॉलिसी बेहतर रहेगी।
- नरेंद्र भूषण, सीईओ, ग्रेटर नोएडा
लैंड पूल पॉलिसी के मौजूदा प्रारूप में तय लैंड यूज पर आपत्ति है। पहला, किसानों को जितनी जमीन मिलनी है उसके ज्यादातर हिस्से में उद्योग लगाने का प्रावधान है। व्यवसाय व रिहायश के लिए बहुत कम गुंजाइश है। दूसरा, इस मॉडल में किसानों की 75 फीसदी जमीन जा रही है, उसे सिर्फ 25 फीसदी ही मिलेगी। इससे किसानों को नुकसान होगा।
- मनवीर भाटी, प्रवक्ता, किसान (सेवा) संघर्ष समिति
इन परियोजनाओं के लिए खरीदी जानी है जमीन
प्रोजेक्ट जमीन
राया हेरिटेज सिटी 9350 हेक्टेयर
टप्पल-बाजना इंडस्ट्रियल टाउनशिप 11104 हेक्टेयर
यीडा सिटी का विस्तार 8000 हेक्टेयर
न्यू आगरा सिटी 12000 हेक्टेयर
न्यू ग्रेटर नोएडा 51000 हेक्टेयर
यीडा की फिल्म सिटी 1000 हेक्टेयर
ग्रेनो का मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब व लॉजिस्टिक हब 1208 हेक्टेयर