नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि निठारी के नाले में मिलीं हड्डियां आखिर किसकी थीं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद निठारी में निराशा, गम और गुस्सा है। मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली के बरी होने से पीड़ित नाराज हो गए। उनका दर्द छलक उठा।
नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में करीब 17 साल चली सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट से मुख्य आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली के बरी होने के बाद पीड़ित सदमे में हैं। सोमवार को आए फैसले के बाद एक बार फिर पीड़ितों का दर्द बाहर आ गया है।
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वहीं, फैसले के बाद एक बार फिर सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि निठारी के नाले में मिलीं हड्डियां आखिर किसकी थीं। निठारी में फिलहाल केवल दो पीड़ित परिवार रहते हैं। इनमें से एक ने इस मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की है।
वहीं दूसरे ने पंढेर की कोठी पर ईंट फेंक कर गुस्से का इजहार किया। पीड़ितों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले की दोबारा जांच करने की मांग की है।
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सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद नोएडा के सेक्टर 31 स्थित डी-5 कोठी पर लोगों की भीड़ जुट गई।
मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली के बरी होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी। इस कांड में लापता हुई ज्योति (10) की मां सुनीता हाईकोर्ट के फैसले की खबर सुनकर फफक पड़ीं। उन्हें दोनों के बरी होने के फैसले पर विश्वास नहीं हो रहा है।
वहीं ज्योति के पिता झब्बू लाल ने कहा कि इतने साल बीत जाने के बाद भी हम लोगों को न्याय नहीं मिला। अब सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद है। झब्बू कहते हैं कि 17 साल पहले हम लोग पंढेर की कोठी के सामने कपड़े की धुलाई और आयरन का काम कर रहे थे। तभी बेटी ज्योति कपड़े लेकर दुकान से बाहर निकली।
जिसके बाद वापस नहीं आई। जब झब्बू पत्नी के साथ बेटी को ढूंढने बाहर निकले तब डी-5 कोठी के सामने मोनिंदर और सुरेंद्र मिल गए। ज्योति के बारे में पूछने पर दोनों ने जवाब नहीं दिया। बाद में जब निठारी कांड का खुलासा होने पर दोनों ने उसके सामने गुनाह कबूल कर लिया था।
पीड़ित रामकिशन ने ईंट फेंककर किया गुस्से का इजहार
वर्ष 2006 के निठारी कांड में रामकिशन का साढ़े तीन साल का बेटा हर्ष भी लापता हो गया था। सोमवार को जब रामकिशन सेक्टर-39 में ड्यूटी कर रहे थे तब उन्हें कोर्ट से पंढेर और कोली को बरी किए जाने की खबर मिली। वह तुरंत वह अपना काम छोड़कर सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी पहुंच गए। उन्होंने सड़क से ईंट उठाकर पंढेर की कोठी पर फेंक दिया। इसके बाद वहीं गंभीर मुद्रा में गुस्से का इजहार किया। काफी देर तक चुपचाप सड़क पर खड़े होकर डी-5 कोठी को देखते रहे और वहां से बिना किसी से बात किए चले गए।
सीबीआई ने नहीं रखा ठीक से पक्ष : पीड़ित
पीड़ित झब्बू लाल का कहना है कि सीबीआई ने इस मामले में ठीक से जांच नहीं की। इसी वजह से पंढेर और कोली बरी हो गए। उन्होंने कहा कि मामले में खुलासे के बाद सीबीआई के अधिकारियों ने निठारी और आसपास से पीड़ित परिवारों को भगा दिया था। किसी को डरा कर तो किसी को प्रलोभन देकर हटा दिया गया था। उन्होंने दावे से कहा कि सीबीआई अगर सभी साक्ष्यों को कोर्ट में सही तरीके से पेश करती तो पीड़ितों को जरूर न्याय मिलता। वहीं सुनीता ने कहा कि मामले की तफ्तीश नहीं सही से नहीं की गई जिसका इसका फायदा दोनों आरोपियों को मिला।
पंढेर व कोली ने पैर पकड़कर कहा था, गलती हो गई
सुनीता ने बताया कि जांच शुरू होने के बाद पुलिस ने पंढेर और कोली को पकड़ लिया था। तब थाने में पंढेर और कोली ने उसके पैर पकड़ कर कहा था कि उनसे गलती हो गई। अब 17 वर्ष बाद उन्हीं दोनों को बरी कर दिया गया।
आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी नरसंहार में सीबीआई कोर्ट से फांसी की सजा पाए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने कहा, पुलिस दोनों के खिलाफ आरोपी साबित करने में विफल रही। न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने जांच पर नाखुशी जताते हुए कहा, जांच बेहद खराब थी सबूत जुटाने की मौलिक प्रक्रिया का पूरी तरह उल्लंघन किया गया। जांच एजेंसियों की नाकामी जनता के विश्वास से धोखाधड़ी है।
हाईकोर्ट ने कहा, जांच एजेंसियों ने अंग व्यापार के गंभीर पहलुओं की जांच किए बिना एक गरीब नौकर को खलनायक की तरह पेश कर उसे फंसाने का आसान तरीका चुना। ऐसी गंभीर चूक के कारण मिलीभगत सहित कई तरह के निष्कर्ष संभव हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी अपीलकर्ताओं की निचली अदालत से स्पष्ट रूप से निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिला। सीबीआई की विशेष अदालत ने 13 फरवरी 2009 को दोनों को दुष्कर्म और हत्या का दोषी मानकर फांसी की सजा सुनाई थी। पंढेर और कोली पर 18 मासूमों और एक महिला से दुष्कर्म व हत्या का आरोप था। इस मामले अदालत में पहला केस 8 फरवरी, 2005 को दर्ज किया गया था।
पंढेर की कोठी से हड्डी या कंकाल नहीं मिला
अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि अभियोजन पक्ष लगातार अपना रुख बदलता रहा। पहले पंढेर और कोली पर संयुक्त रूप से आरोप लगाए। बाद में कोली पर दोष मढ़ दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मानव अवशेषों की बरामदगी मकान संख्या डी-5 और डी-6 की सीमा से परे स्थित जल निकासी से हुई थी। पंढेर के घर से कोई बरामदगी नहीं की गई थी।