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Noida News: जिले में ड्रग का जाल बिछा रहा नाइजीरियाई नेटवर्क

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जिले में ड्रग का जाल बिछा रहा नाइजीरियाई नेटवर्क
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एमडीएमए फैक्टरी से लेकर हाईराइज सोसाइटियों तक सप्लाई का हो चुका है खुलासा
नाइजीरियन के वीजा सत्यापन और विदेशी नागरिकों की निगरानी पर फिर उठे सवाल
मोहम्मद बिलाल
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सामने आए ड्रग्स तस्करी के मामलों ने एक बार फिर विदेशी नागरिकों के सत्यापन, वीजा नियमों के पालन और सिंथेटिक ड्रग्स के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष-2024 में करोड़ों रुपये की एमडीएमए फैक्टरी का भंडाफोड़ और वर्ष 2026 में दो अलग-अलग मामलों में नाइजीरियाई नागरिकों की गिरफ्तारी से यह संकेत मिला है कि जिले में सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी का नेटवर्क समाप्त नहीं हुआ है।
पुलिस की जांच में कई मामलों में यह बात सामने आई कि आरोपी हाईराइज सोसाइटियों, पार्टी सर्किट और युवाओं तक मादक पदार्थ पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हालिया मामलों में बरामद अधिकांश मादक पदार्थ एमडीएमए और मेथामफेटामाइन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स रहे हैं, जिन्हें आमतौर पर पार्टी ड्रग कहा जाता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि ऐसे नेटवर्क सोशल मीडिया, मैसेजिंग एप और पुराने ग्राहकों के जरिए संपर्क बनाकर सीमित और भरोसेमंद नेटवर्क में सप्लाई करते हैं, जिससे इनका पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले कुछ युवाओं को आसान कमाई, पार्टी संस्कृति, जिज्ञासा या दोस्तों के प्रभाव का फायदा उठाकर नशे की ओर आकर्षित करने की कोशिश की जाती है।
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पता बदलने से सत्यापन में होती है परेशानी
जांच एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती विदेशी नागरिकों का नियमित सत्यापन भी है। नियमों के अनुसार भारत में रहने वाले विदेशी नागरिकों को वीजा की शर्तों का पालन करना होता है और स्थानीय स्तर पर उनका सत्यापन भी महत्वपूर्ण माना जाता है। समय-समय पर पुलिस द्वारा सत्यापन अभियान चलाए जाते हैं लेकिन हर विदेशी नागरिक का नियमित सत्यापन और वीजा स्थिति की निगरानी लगातार बनी रहे, इसे लेकर सुरक्षा विशेषज्ञ अधिक प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता बताते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क अक्सर महानगरों का इस्तेमाल ट्रांजिट और वितरण केंद्र के रूप में करने की कोशिश करते हैं। राजधानी दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय संपर्क, कूरियर नेटवर्क और बड़े शहरी क्षेत्र होने के कारण जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की भी जांच करती हैं। मगर आरोपियों के समय-समय पर अपना पता बदलने के कारण परेशानी होती है।
2024 के बाद चला था सत्यापन अभियान
ड्रग फैक्टरी पकड़े जाने के बाद कमिश्नरेट पुलिस ने विदेशी नागरिकों का विशेष सत्यापन अभियान चलाया। इस दौरान कई अफ्रीकी मूल के नागरिक और अलग कार्रवाई में चार नाइजीरियाई नागरिक वीजा नियमों के उल्लंघन के आरोप में पकड़े गए थे। ये कार्रवाई मुख्य रूप से विदेशी अधिनियम और वीजा नियमों से संबंधित थी।
वर्जन
पुलिस टीम पकड़े गए नाइजीरियन नेटवर्क के गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। विदेशी नागरिकों का समय-समय पर सत्यापन भी किया जाता है। -रवि शंकर निम, डीसीपी, ग्रेटर नोएडा

प्रमुख मामले
-जुलाई 2026: एसओजी और बीटा-2 थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर 143 ग्राम क्रिस्टल एमडीएमए के साथ एक नाइजीरियाई नागरिक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक तराजू, स्कूटी और नकदी भी बरामद की। जांच में आरोपियों पर हाईराइज सोसायटियों और युवाओं तक पार्टी ड्रग्स पहुंचाने का आरोप है।
जून 2026: ग्रेटर नोएडा पुलिस ने दो नाइजीरियाई मूल के नागरिकों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 39.27 ग्राम क्रिस्टल एमडीएमए, मेथामफेटामाइन, इलेक्ट्रॉनिक तराजू और स्कूटी बरामद की थी। पुलिस के अनुसार दोनों स्थानीय स्तर पर ड्रग सप्लाई नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
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अप्रैल 2024: ओमिक्रॉन-1 क्षेत्र में किराये के मकान में चल रही एमडीएमए बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ था। चार नाइजीरियाई नागरिक गिरफ्तार किए गए। पुलिस ने करीब 26 किलोग्राम एमडीएमए, रॉ-मैटेरियल और केमिकल बरामद किए। बरामद मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 100 से 200 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई थी।
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