अधिकारियों को तत्काल सुधार के लिए व्यावहारिक कदम उठाने के निर्देशजापानी मियावाकी विधि से बड़े पैमाने पर पौधरोपण करने को कहा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। एनजीटी ने दक्षिण दिल्ली के वन क्षेत्र की दयनीय स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान अधिकरण ने पाया कि वन विभाग के अधीन आने वाले इन क्षेत्रों में न तो उचित बाड़ लगी है, न चेतावनी बोर्ड और न ही पर्याप्त पौधरोपण हुआ है। इसके अलावा वन भूमि के आसपास ठोस अपशिष्ट और निर्माण-विनाश कचरा जमा होने से पर्यावरणीय क्षरण हो रहा है।
न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेष सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वन भूमि को मजबूत बाड़ से सुरक्षित किया जाए। साथ ही, अवैध प्रवेश को रोकने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और घने वन विकास के लिए जापानी मियावाकी विधि से बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाए। इसके अलावा वन क्षेत्र से सभी प्रकार का ठोस व निर्माण अपशिष्ट तुरंत हटाया जाए। एनजीटी ने लैंडलॉक वन भूखंडों (जिनकी पहुंच सीमित है) पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और सुधार के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करने को कहा है। दक्षिण दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट को पहुंच संबंधी समस्याओं पर अलग से रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। सभी रिपोर्ट और अनुपालन दस्तावेज एक माह में देने होंगे। मामले में अगली सुनवाई 5 जनवरी को होगी। एनजीटी ने 25 सितंबर 2025 के पिछले आदेश का हवाला देते हुए एक वकील की उपस्थिति में हुई त्रुटि को सुधारने का भी निर्देश दिया। एनजीटी ने जोर देकर कहा कि वन भूमि की सुरक्षा व पर्यावरणीय क्षरण को रोकना अत्यंत आवश्यक है अन्यथा दिल्ली की हरियाली और पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।