-कार्यकर्ता जयलता ने श्रमिकों के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र तक लाने में निभाई अहम भूमिका
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। तिलपता का आंगनबाड़ी केंद्र केवल एक शैक्षिक केंद्र नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए विश्वास और प्रगति का प्रतीक बन चुका है। कार्यकत्री जयलता ने साबित कर दिया कि यदि नीयत साफ हो और प्रयास निरंतर हों तो समाज के सबसे वंचित वर्ग तक भी सकारात्मक परिवर्तन पहुंच सकता है।
महिला कल्याण एवं बाल विकास सेवा पुष्टाहार प्रमुख सचिव लीना जौहरी ने बताया कि ग्रेटर नोएडा का तिलपता गांव क्षेत्र प्रवासी मजदूर परिवारों का ठिकाना है। इन परिवारों के माता-पिता रोजगार की तलाश में सुबह से शाम तक मेहनत-मज़दूरी में जुटे रहते हैं। रोजी-रोटी की इस जद्दोजहद में बच्चों की परवरिश, पोषण, समय पर टीकाकरण और प्रारंभिक शिक्षा जैसे पहलू छूट जाते हैं। यही कारण था कि क्षेत्र के अधिकांश बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों से वंचित रह जाते और विद्यालय में प्रवेश के समय अन्य बच्चों की तुलना में पिछड़ जाते थे।
इसी चुनौती को गंभीरता से समझा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जयलता ने समझा। उन्होंने न केवल समस्या को पहचाना, बल्कि इसे हल करने के लिए ठोस कदम भी उठाए। जयलता ने प्रवासी परिवारों तक पहुंचने का बीड़ा उठाया। वे घर-घर जाकर माता-पिता से संवाद करतीं और उन्हें समझाती कि बच्चों का स्वास्थ्य और शिक्षा उनके भविष्य की बुनियाद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक शिक्षा ही आगे चलकर बच्चों के जीवन की दिशा तय करती है।
बच्चों को आकर्षित करने को उठाए रचनात्मक कदम
केंद्र पर बच्चों को आकर्षित करने के लिए उन्होंने कई रचनात्मक कदम उठाए। खेल-खेल में सीखने की गतिविधियां, कहानी सुनाना और गीत-संगीत जैसी विधियां बच्चों के बीच लोकप्रिय हुईं। स्थानीय व कम लागत वाले साधनों से शैक्षिक खेल और सामग्री तैयार की गई, जिससे बच्चे सहज रूप से केंद्र से जुड़ने लगे। निरंतर प्रयासों के परिणाम जल्द ही दिखने लगे। हर साल 20-25 प्रवासी परिवारों के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़ने लगे। बच्चों की नियमित उपस्थिति में वृद्धि हुई और उनमें आत्मविश्वास विकसित हुआ। माता-पिता भी अब अपने बच्चों के पोषण, टीकाकरण और शिक्षा के प्रति सजग हो गए हैं। कई बच्चे अब पास के विद्यालयों में दाखिल होकर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।