दिल्ली एम्स के तंत्रिका शल्यचिकित्सा विभाग के 60 साल पूरे, उपलब्ध हैं दुनियाभर की सभी तकनीक
05 हजार सर्जरी हो रहीं हर साल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। न्यूरो सर्जरी करवाने के लिए दूसरे राज्यों से एम्स दिल्ली तक का सफर कर रहे मरीजों को आने वाले समय में बड़ी राहत मिलेगी।मरीजों को दिल्ली आने की जरूरत नहीं रहेगी, बल्कि अपने राज्य के एम्स में ही दिल्ली की तरह आधुनिक तकनीक की मदद से सर्जरी करवा सकेंगे। इससे दिल्ली एम्स में भी मरीजों का इंतजार कम होगा। देशभर के एम्स में न्यूरो सर्जरी विभाग को शुरू करने के साथ इनमें प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध करवाने में एम्स दिल्ली महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
एम्स के तंत्रिका शल्यचिकित्सा विभाग के 60 साल पूरे होने पर विभागाध्यक्ष डॉ. एसएस काले ने बताया कि न्यूरो सर्जरी विभाग में हर माह बाहर से आने वाले दो से तीन स्टाफ को ट्रेनिंग दी जाती है। मौजूदा समय में छह एम्स में न्यूरो सर्जरी विभाग सेवाएं दे रहा है। जल्द दूसरे एम्स में भी सुविधाएं शुरू हो जाएंगी। पिछले 60 साल में विभाग ने काफी तरक्की की है। शनिवार को तंत्रिका शल्यचिकित्सा विभाग ने 60वीं वर्षगांठ पर उत्सव का आयोजन किया। इसमें आयोजन में मार्च 1965 में विभाग को शुरू करने वाले प्रो. पीएन टंडन (97 साल) और प्रो. एके बनर्जी भी उपस्थित रहे। डॉ. काले ने बताया कि 1, मार्च, 65 को विभाग शुरू हुआ। उस समय विभाग के पास न तो बिस्तर था और न ऑपरेशन थियेटर। सबसे पहली सर्जरी 25 दिन बाद 25 मार्च को हुई। मौजूदा समय में हर साल पांच हजार सर्जरी हो रही हैं। यह बड़ी उपलब्धि है। पिछले 60 साल में जटिल मस्तिष्क ट्यूमर, रीढ़ की हड्डी की चोटें और कपाल-रीढ़ की हड्डी में चोट सहित दूसरे कई इलाज किए। ट्रॉमा सेंटर शुरू होने के बाद हर साल 1500 से अधिक ट्रॉमा से संबंधित सर्जरी हो रही है। इसके अलावा गामा नाइफ सेंटर में हर साल 900 से अधिक रोगियों का उपचार होता है।
जनसंख्या के साथ बड़ी चुनौती
देश में जनसंख्या के साथ न्यूरो सर्जन की चुनौतियां भी बढ़ी हैँ। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एम्स में सर्जरी का इंतजार काफी बढ़ गया है। इस परेशानी को दूर करने के लिए विभागाध्यक्ष ने बिस्तर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। मौजूदा समय में एम्स में नौ ऑपरेशन थियेटर हैं। इनमें से दो में दिन-रात सर्जरी होती है। मरीजों के लिए एम्स मुख्य कैंपस में 40 और ट्रामा सेंटर में 37 आईसीयू बिस्तर हैं।
अगली पीढ़ी के लिए तैयार हो रहा एम्स
आने वाले दिनों में न्यूरो सर्जरी के मामले बढ़ेंगे। इसे देखते हुए एम्स दिल्ली नए छात्रों को ट्रेनिंग व शोध को बढ़ा रहा है। इसके अलावा विभाग ने 1965 से अभी तक हुए कार्य को लेकर एक पुस्तक भी लिखी है जो न्यूरो सर्जरी के इतिहास के साथ बदलाव को दिखाएगी। विभाग ने लघु फिल्म प्रेसिजन एंड पैशन: द एम्स न्यूरोसर्जरी स्टोरी भी लांच की है।
सीमित संसाधन में दी सुविधा
विभाग के संस्थापक रहे प्रो. पीएन टंडन ने कहा कि वर्ष 1965 में सीमित संसाधनों में शुरू हुआ विभाग उन्नत सुविधाएं उपलब्ध करवा रहा है। दशकों के अथक समर्पण और नवाचार के माध्यम से एक बेंचमार्क स्थापित किया गया है। चुनौतियों को अवसरों में बदला गया। वहीं, पूर्व प्रोफेसर प्रो. एके बनर्जी ने कहा कि शुरुआती दिनों में पूरे देश में तंत्रिका शल्यचिकित्सा की विशेषज्ञता का प्रसार करने के प्रति दृढ़ता एवं प्रतिबद्धता थी।