नोएडा। सेक्टर-32-25 का वेव मेगा सिटी सेंटर प्राइवेट लिमिटेड (डब्ल्यूएमसीसी) दिवालिया समाधान प्रक्रिया के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल (एनसीएलटी) पहुंच गया है। कंपनी की ओर से एनसीएलटी में दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवेदन किया गया। करीब 2400 खरीदारों के हित में कंपनी ने ऐसा फैसला लेने की बात कही। कंपनी की 1.08 लाख वर्गमीटर जमीन का आवंटन निरस्त करते हुए हाल ही में नोएडा प्राधिकरण ने सीलिंग और कब्जे की कार्रवाई की है। नोएडा प्राधिकरण वेव ग्रुप की इस कंपनी के एनसीएलटी में जाने के बाद एनसीएलटी में अपना पक्ष रखने के लिए आवेदन करेगा।
वेव ग्रुप के प्रतिनिधियों के मुताबिक नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर 32 और 25 में आवासीय-सह-वाणिज्यिक परियोजना को मनमाने तरीके से सील कर दिया है। कंपनी की ओर से इस परियोजना में 3,800 करोड़ रुपये का निवेश किया है। जिसमें इसके प्रमोटर्स और उनके सहयोगियों द्वारा 2,213 करोड़ रुपये का निवेश शामिल हैं। इसके अलावा बैंक लोन के रूप में 200 करोड़ की राशि ली गई है। खरीदारों से करीब 1400 करोड़ रुपये की राशि ली गई है। इसमें से 2000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान विभिन्न सरकारी एजेंसियों को किया गया है, जिसमें नोएडा प्राधिकरण को किया गया लगभग 1600 करोड़ का भुगतान शामिल है।
कंपनी का मानना है कि अब एनसीएलटी इस मामले में इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) नियुक्त कर दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू कराए। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट में कई यूनिट अभी भी बिना बिक्री वाले हैं। वहीं कुछ यूनिट तैयार हो चुके हैं। इससे करीब 200 करोड़ आएंगे, जिससे काम पूरा किया जा सकता है। कंपनी चाह रही है कि आईआरपी की ओर से इस काम को पूरा कराया जाए। अब कंपनी का किसी भी तरह का पैसे का क्लेम पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
वेव ग्रुप एनसीएलटी में यह रखेगा पक्ष
माना जा रहा है कि कंपनी एनसीएलटी में अपनी वित्तीय स्थिति की जानकारी देगी। उनकी ओर से बताया जाएगा कि कंपनी में कैश फ्लो है। इसमें कैश की जरूरत नहीं है। लेकिन ऑपरेशनल क्रेडिटर नोएडा प्राधिकरण ने इसमें जो डिमांड क्रियेट किया है। इस चक्कर में कंपनी दिवालिया हो गई है। इसमें इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) नियुक्त किया जाए और समाधान योजना लाकर मामले को निपटाया जाए। इसका मकसद खरीदारों को आगे कोई दिक्कत नहीं हो।
यह है वेव मेगा सिटी सेंटर का मामला
नोएडा के सेक्टर-25 और 32 के बीच स्थित वेव मेगा सिटी सेंटर प्राइवेट लिमिटेड ने 2011 में लीजहोल्ड के आधार पर 6.18 लाख वर्ग मीटर भूमि का आवंटन लगभग 1.07 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से 6,622 करोड़ रुपये में कराया था। मूल योजना के हिसाब से पुनर्भुगतान की अवधि पहले दो साल मोरेटोरियम के बाद 16 अर्द्धवार्षिक किस्तों में थी। दिसंबर 2016 में खरीदारों को समय पर यूनिट की डिलीवरी देने तथा किस्तों पर बकाया राशि की वसूली के लिए नोएडा प्राधिकरण प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी (पीएसपी) लेकर आया।
पीएसपी के तहत प्राधिकरण ने डब्ल्यूएमसीसी की काफी जमीनें वापस ले लीं। इसमें ग्रुप की ओर से जमा की गई रकम को ब्याज की राशि मान ली गई। 10 मार्च 2021 को, नोएडा प्राधिकरण द्वारा 1.08 लाख वर्ग मीटर अधिग्रहण जमीन के आवंटन को निरस्त करके वापस ले लिया। साथ ही दो टावरों को सील कर दिया गया। हालांकि अभी भी करीब 56 हजार वर्गमीटर जमीन कंपनी के पास है।
वेव ग्रुप का पक्ष
वेव मेगा सिटी सेंटर प्राइवेट लिमिटेड के मामले पर कोई भी टिप्पणी नहीं कर सकते। यह मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है। हम खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। - राजीव गुप्ता, प्रबंध निदेशक, वेव इंफ्राटेक
नोएडा प्राधिकरण का पक्ष
नोएडा प्राधिकरण एनसीएलटी में आवेदन करेगा। इसमें अदालत से यह अनुरोध किया जाएगा कि वेव ग्रुप के इस मामले में किसी तरह के निर्णय से पहले नोएडा प्राधिकरण का पक्ष भी सुनें।