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राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता सप्ताह : पुरुषों में भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर

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राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता सप्ताह : पुरुषों में भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर
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- उम्र बढ़ने के साथ हार्मोनल असंतुलन के साथ बढ़ रहा जोखिम, 100 महिलाओं में एक पुरुष प्रभावित

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। ब्रेस्ट कैंसर आमतौर पर महिलाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है, लेकिन यह पुरुषों को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले बहुत कम होते हैं। दूसरी ओर लोगों में जागरूकता की भी कमी होती है और यही कारण है कि लक्षण दिखने के बावजूद वे डॉक्टर से सलाह लेने में देरी कर देते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उम्र बढ़ने, हार्मोनल असंतुलन और अन्य कारणों से पुरुषों में भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा हो सकता है। इस विषय पर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि जल्दी पहचान कर इलाज शुरू किया जा सके और जीवन को बचाया जा सके।


मेदांता अस्पताल के डॉ वी सीनू बताते हैं हर सौ महिलाओं में लगभग एक पुरुष भी इससे प्रभावित होता है। उम्र बढ़ने के साथ या हार्मोनल असंतुलन, विशेषकर गाइनेकोमास्टिया (पुरुषों के स्तन ग्रंथि ऊतक का असामान्य रूप से विकास) जैसी स्थिति में पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अगर बायोप्सी से कैंसर की पुष्टि होती है, तो उसकी स्टेज जानने के लिए एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या पीईटी स्कैन जैसे परीक्षण किए जाते हैं। उपचार के तौर पर सर्जरी, रेडिएशन, हार्मोन थेरेपी या कभी-कभी कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ती है।
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अगर बीमारी शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ जाए तो इलाज की सफलता दर काफी अधिक होती है। देर से पहचानने पर उपचार चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए पुरुषों को भी अपने शरीर में किसी भी असामान्य परिवर्तन या गांठ को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।



60 साल के अधिक उम्र के लोगों को ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत



मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के डॉ. प्रो.नवनीत कौर बताती हैं कि पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी है, जो अक्सर 60 साल या उससे अधिक उम्र में देखी जाती है। इसकी दुर्लभता के कारण पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का अक्सर बाद के चरण में पता चलता है, जिससे इलाज मुश्किल हो सकता है। इसलिए, लक्षणों की पहचान और बचाव के उपायों के बारे में जागरूकता बहुत जरूरी है।
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फोर्टिस अस्पताल की डॉ. ज्योति आनंद बताती हैं कि पुरुष स्तन कैंसर का पहला संकेत अक्सर स्तनों में से किसी एक में एक सख्त, दर्द रहित गांठ होती है। आमतौर पर यह निप्पल के पीछे होती है।



लक्षण

- छाती में गांठ या सूजन। यह सबसे आम लक्षण है, जो आमतौर पर निप्पल के पास होता है।
- निप्पल से रक्त या अन्य तरल पदार्थ का रिसाव। यह एक अन्य महत्वपूर्ण लक्षण है, जिसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
- त्वचा में बदलाव या अल्सर। ब्रेस्ट की त्वचा पर गड्ढे, रंग लाल होना या मोटापन कैंसर का संकेत हो सकता है।
- बगल में लिम्फ नोड्स में सूजन। यह कैंसर के फैलने का संकेत हो सकता है।



बचाव के उपाय

- नियमित जांच और स्व-जांच से ब्रेस्ट कैंसर का पता जल्दी लगाया जा सकता है।
- शराब का सेवन कम करना, नियमित व्यायाम करना और स्वस्थ वजन बनाए रखना ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है।
- विकिरण के संपर्क में आने से बचना चाहिए, खासकर छाती के क्षेत्र में।
- जिन पुरुषों के परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास है उन्हें जेनेटिक काउंसलिंग और जांच करवानी चाहिए।
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