मोटो जीपी: 2027 तक 100 फीसदी सस्टनेबल फ्यूल पर दौड़ेंगी सुपर बाइक्स
- ग्रीन फ्यूल को लेकर किया जा रहा शोध, अभी 30 फीसदी सस्टनेबल फ्यूल का हो रहा इस्तेमाल
संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। मोटो ग्रांड प्रिक्स के ट्रैक पर फर्राटा भरतीं सुपर बाइकों में आगामी तीन से चार वर्षों में पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन फ्यूल का उपयोग किया जाएगा। वर्ष 2027 तक 100 प्रतिशत सस्टनेबल फ्यूल का उपयोग करने का मोटो जीपी का लक्ष्य है। 22 से 24 सितंबर तक बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में होने जा रही इस रेस में अभी 30 प्रतिशत सस्टनेबल फ्यूल का उपयोग होगा। वहीं मोटो जीपी भारत में ट्रैक से इतर उपयोग में आने वाले अधिकतर वाहन पर्यावरण अनुकूल ही होंगे।
विश्व के सबसे बेहतरीन राइडर्स 1000 सीसी के शक्तिशाली इंजन वाली वाली सुपर बाइक जब चलाएंगे तो जबरदस्त गर्जन के साथ ईंधन भी जलेगा। इनमें डुकाटी, केटीएम, होंडा, कावासाकी, अप्रिलिया जैसी कंपनियों की 1000 सीसी की बाइकें मोटो जीपी में दौड़ेंगी। खास बात यह है कि ट्रैक पर दौड़ते समय यह लगभग 9 से 12 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती हैं। इन बाइकों में अनलेडेड (लेड का उपयोग नहीं) पेट्रोल का उपयोग किया जाता है। 366 किलोमीटर की रफ्तार पर हवा से बातें करतीं इन पॉवरफुल बाइकों का इंजन वर्तमान में 30 प्रतिशत कम कार्बन का उत्सर्जन करता है।
बाइक कंपनियां कार्बन उत्सर्जन में और कमी के लिए लगातार शोध कर रही हैं। अगले वर्ष तक इसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य है। वहीं वर्ष 2027 तक इसे 100 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य है। कंपनियों का प्रयास है कि 2027 तक पूरी तरह से जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) से इस रेस को कराया जाए। इसे विश्वभर में करोड़ों दो पहिया वाहनों पर भी लागू किया जाएगा।
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भारत में नहीं मिलता मोटो जीपी की बाइकों का ईंधन
मोटो ग्रांड प्रिक्स की बाइकों का ईंधन देश में नहीं मिलता है। भारत में 97 ऑक्टेन पेट्रोल उपलब्ध होता है। वहीं इन बाइकों में उपयोग करने के लिए 95 से लेकर 104 रिसर्च ऑक्टेन नंबर (आरओएन) पेट्रोल की आवश्यकता होती है। सुपर बाइकों के लिए यूरोपियन देशों से ईंधन मंगवाया गया है।
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सामान्य पेट्रोल से रुककर मिलती है ऊर्जा
सुपर बाइकों में हाई कंप्रेशन इंजन का उपयोग होता है। सुपर बाइकों को बेहद तेजी से चलने के लिए हाई प्रेशर की आवश्यकता होती है। इसलिए सामान्य पेट्रोल का उपयोग करने से बाइकों को रुक-रुककर ऊर्जा मिलती है। वहीं 95 आरओएन पेट्रोल में गैसोलीन की उचित मात्रा इन बाइकों के अनुकूल होती है।
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ट्रैक के अलावा अन्य में उपयोग होंगे इलेक्ट्रिक वाहन
मोटो जीपी में पर्यावरण संरक्षण के लिए ट्रैक के अलावा अन्य स्थानों पर इलेक्ट्रिक या सीएनजी वाहनों का उपयोग किया जाएगा। ट्रैक के सबसे नजदीक पिट लेन (मदद के लिए पहुंचने वाले बाइकर्स) में इलेक्ट्रिक बाइकों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा क्विक रेस्पांस व्हीकल और एंबुलेंस भी इलेक्ट्रिक या सीएनजी चलित होंगी।