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Noida News: गंगा घाट पर श्रद्धालुओं का स्नान करना प्रशासन के लिए चुनौती

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मखदुमपुर मेले में घाट बनाने में लगी मशीन स्रोत संवाद
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गंगा स्नान मेले में चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। मखदूमपुर मेले में घाटों की स्थिति बहुत खराब है। गंगा की मुख्य धारा की गहराई अधिक होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए स्नान की जगह गत वर्षों के मुकाबले बहुत कम है। स्नान घाट पर गहराई अधिक होने के कारण यहां पर होने वाला मुख्य स्नान प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मखदूमपुर गंगा घाट पर प्रतिवर्ष मेले का आयोजन किया जाता है। प्रतिवर्ष बरसात के बाद गंगा नदी की भौगोलिक स्थिति बदल जाती है। उबड़ खाबड़ स्थान को समतल करना और मेला स्थल तक रास्ते बनाने में जिला पंचायत को प्रतिवर्ष कई लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं। इसके बाद भी यहां पर आज तक पक्का घाट नहीं बन सका। एक से पांच नवंबर तक चलने वाले गंगा स्नान मेले में चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। जिनका गंगा किनारे पर स्नान करना प्रशासन के सामने एक चुनौती रहेगी।
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श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस की ओर से खतरे के बोर्ड भी लगाए गए हैं। जिन पर लिखा है खतरा और गहरा जल हैं। इससे साफ है कि यदि यहां पक्के घाट बन गए होते तो शायद गहरे जलस्तर की चुनौती का सामना नहीं करना पड़ता। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए गंगा किनारे पर पीएसी की एक फ्लड कंपनी लगाई गई है। साथ ही छह नाव और 20 गोताखोरों की टीम यहां अलर्ट पर रखी गई है। जो किसी भी अनहोनी की आशंका पर नजर रखेगी।
जिला पंचायत द्वारा 73 लाख रुपये के बजट से आयोजित इस मेले में चार लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं। गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य कमाते हैं। इसके अलावा प्रत्येक अमावस्या व पूर्णिमा पर हजारों लोग पतित पावनी में स्नान करते हैं लेकिन गंगा घाट कच्चे होने के कारण श्रद्धालुओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।


खर्च करते हैं बड़ा बजट, पर घाट नहीं बनाते पक्के
क्षेत्र में तीन स्थानों पर कार्तिक पूर्णिमा मेले का आयोजन होता है। जिसमें मखदूमपुर, मनोहरपुर गंगा घाट और बूढ़ी गंगा घाट पर मेले का आयोजन होता है। इन मेलों पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है परंतु श्रद्धालुओं के लिए पक्का घाट आज तक नहीं बना। लंबे समय से पक्के घाट बनाए जाने की मांग चली आ रही है। गंगा में आने वाली बाढ़ से ऊबड़ खाबड़ मेला स्थल को समतल करने में ही प्रशासन के लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं।


मेले के सफल आयोजन के लिए किए प्रबंध
मखदूमपुर मेले को सफल बनाने और सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रशासन द्वारा हर क्षेत्र में विशेष प्रबंध किए गए हैं। मेले को दो सुपर जोन व तीन सेक्टर में बांटा गया है जिसमें तीन क्यूआरटी, एक अस्थायी थाना, एक कंट्रोल रूम, पांच वॉच टावर, दो खोया पाया केंद्र बनाए गए हैं। साथ ही मेला स्थल पर दो पार्किंग, सात बैरियर, पांच यातायात डिवाइडर, श्रद्धालुओं के लिए दो आवासीय सेक्टर व दो बाजार सेक्टर बनाए गए हैं।
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श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात

एक एएसपी, दो सीओ, एक मेला प्रभारी, 116 उपनिरीक्षक, 170 हेड कांस्टेबल, 90 महिला पुलिस कांस्टेबल, 5 ट्रैफिक पुलिस उप निरीक्षक, 25 ट्रैफिक पुलिस के कांस्टेबल, एक कंपनी पीएसी बल, तीन फायर टैंकर, छह घुड़सवार पुलिस, एक पीएसी कंपनी, दो शस्त्र गार्द, एक गुंडा दमन दल, एक शराब निरोधक दस्ता, दो एंटी रोमियो स्क्वॉड, छह नाव, 20 गोताखोर शामिल हैं।

मखदुमपुर मेले में घाट बनाने में लगी मशीन स्रोत संवाद

मखदुमपुर मेले में घाट बनाने में लगी मशीन स्रोत संवाद

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