ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ सिद्धचक्र विधान
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर के नंदीश्वरद्वीप जिनालय में ध्वजारोहण के साथ आठ दिवसीय सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ हुआ। पहले दिन जाप अनुष्ठान एवं मुख्य वेदी के अभिषेक के उपरांत श्रद्धालुओं ने विधान स्थल पहुंचकर अभिषेक व शांतिधारा की।
विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने शांतिधारा की बोलियां लगाते हुए आठ अर्घ्यों की चर्चा करते हुए सभी इंद्र-इंद्राणियों से शांतिधारा में भाग लेने का निवेदन किया। ताकि और अधिक सुख-शांति और समृद्धि को प्राप्त किया जा सके। सर्वोच्च बोली लेकर शांतिधारा करने का सौभाग्य धर्मचंद जैन, मीना देवी जैन को प्राप्त हुआ।
शांतिधारा के पश्चात नित्य नियम पूजन करते हुए नंदीश्वरद्वीप जिनालय में पूजा-अर्चना की गई। श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान करते हुए आठ अर्घ्य मांडले पर समर्पित किए गए। क्षेत्र पर विराजमान आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ससंघ ने प्रवचन में कहा कि आत्मा का स्वरूप सिद्धत अवस्था को प्राप्त करना है। आज व्यक्ति अपने हित छोड़कर दूसरों के अहित में लगा हुआ है। वह अपने दुख से दुखी न होकर दूसरों के सुख से दुखी है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। व्यक्ति को अपने अवगुण देखने चाहिए और दूसरे के गुणों को देखना चाहिए और उस जैसा बनने का प्रयत्न करना चाहिए। यदि ऐसा व्यक्ति करने लगे तो वह सर्वोच्च पद को प्राप्त करता है और वह जगत में महान हो जाता है।
जिनेंद्र भगवान का भक्त भोगों का भिखारी नहीं होता है वह तो वीतरागता पोषण करता है। यही पूजा की सर्वोत्कृष्ट उपलब्धि है। यह विधान करने से प्राणी संसार चक्र से छूटकर सिद्धशिला को प्राप्त करता है। आज के सौधर्म इंद्र अनंतवीर जैन, मंजू जैन, कुबेर इंद्र धर्मचंद जैन एवं ध्वजारोहण करने का सौभाग्य श्रेयांश जैन को प्राप्त हुआ। क्षेत्र के मंत्री राजीव जैन ने सभी पात्रों का मंगल तिलक माल्यार्पण कर स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मंगल आरती भजन, भक्ति व प्रश्नमंच का आयोजन किया गया। इसके बाद 48 द्वीपों द्वारा भक्तामर पाठ हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, विनय जैन, सुनील जैन, अनिल जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, अतुल जैन, कमल जैन आदि का पूर्ण सहयोग रहा।