- डॉक्टर से लेकर प्रिंसिपल, प्रोफेसर, कर्नल और चार्टर्ड अकाउंटेंट तक को साइबर जालसाजों ने बनाया निशाना
- शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर सबसे ज्यादा ठगी, एपीके फाइल से होने वाली ठगी को लेकर भी लोग सतर्क नहीं
नवीन कुमार
ग्रेटर नोएडा। शहर के पढ़े-लिखे लोग खुद को कंप्यूटर और तकनीकी दुनिया का जानकार मानते हैं, लेकिन साइबर अपराधी उन्हें भी आसानी से अपना शिकार बना रहे हैं। जल्द अमीर बनने और कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का लालच पढ़े-लिखे लोगों पर भारी पड़ रहा है। साइबर ठगी का शिकार होने वालों में विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर, नामी स्कूलों के प्रिंसिपल, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर और कर्नल तक शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा लोग शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर ठगी का शिकार हो रहे हैं।
जल्द पैसा कमाने का लालच और लापरवाही पड़ रही भारी
पुलिस और प्रशासन की ओर से लगातार लोगों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद लोग लापरवाही बरत रहे हैं। जल्द पैसा कमाने की चाह में लोग साइबर अपराधियों के झांसे में आ जाते हैं। ठगी का शिकार होने वालों में अनपढ़ लोगों की संख्या करीब 10 प्रतिशत बताई जा रही है, जबकि 90 प्रतिशत पीड़ित किसी न किसी अच्छे पद पर रह चुके हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके बावजूद वे शेयर मार्केट से जुड़े विज्ञापनों पर आंख मूंदकर विश्वास कर निवेश कर रहे हैं।
कुछ पढ़े-लिखे लोगों के साथ साइबर ठगी की घटनाएं
केस-1 :
दोगुना मुनाफा कमाने के चक्कर में 1.35 करोड़ रुपये गंवाए
दादरी क्षेत्र की एक सेक्टर निवासी महिला एक नामी स्कूल में शिक्षिका हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर शेयर मार्केट में निवेश से संबंधित एक विज्ञापन देखा और निवेश शुरू किया। शुरुआत में एक हजार रुपये निवेश करने पर उन्हें दोगुने से अधिक का मुनाफा हुआ। इसके बाद शिक्षिका ने लगातार निवेश करना शुरू कर दिया और एक माह के भीतर 1.35 करोड़ रुपये निवेश कर दिए। पीड़िता को एप में करीब तीन करोड़ रुपये का मुनाफा दिखाई दे रहा था, लेकिन वह रकम निकाल नहीं पा रही थीं। उन्हें बताया गया था कि जितना अधिक निवेश करेंगी, उतना ही ज्यादा फायदा होगा। ठगी का अहसास होने के बाद उन्होंने पुलिस से मदद मांगी।
केस-2 :
एपीके फाइल के फ्रॉड से अनजान थे वाइस चांसलर
शहर के एक नामी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर भी साइबर ठगी में 1.87 लाख रुपये गंवा चुके हैं। उनके मोबाइल पर कार के चालान से संबंधित एक संदेश आया था। इसमें एपीके फाइल भेजी गई थी। वह एपीके फाइल के जरिए होने वाली ठगी से अनजान थे। उन्होंने चालान देखने के लिए फाइल खोल दी। इसके बाद उनके खाते से 1.87 लाख रुपये निकाल लिए गए। इसी तरह एक अन्य विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त वाइस चांसलर भी साइबर ठगी में लाखों रुपये गंवा चुके हैं।
केस-3 :
नीता और आकाश अंबानी से बात होने का दावा कर किया तीन लाख का निवेश
सेक्टर ओमेगा-1 की एक सोसाइटी निवासी सेना के सेवानिवृत्त कर्नल ने फेसबुक पर रिलायंस कंपनी से जुड़ा एक विज्ञापन देखा। विज्ञापन में नीता अंबानी और आकाश अंबानी समेत अन्य लोगों के मोबाइल नंबर भी दिए गए थे। कर्नल ने उन नंबरों पर फोन किया। उन्होंने नीता और आकाश अंबानी से बात होने का भी दावा किया। इस पर विश्वास करते हुए उन्होंने तीन लाख रुपये का निवेश कर दिया। बाद में उन्हें ठगी का पता चला, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से मदद मांगी।
केस-4 :
बेटे ने समझाया, फिर भी नहीं माने और भेज दिए 44 हजार रुपये
सेक्टर ओमेगा-1 की एक सोसाइटी में रहने वाले एयरफोर्स के सेवानिवृत्त अधिकारी भी साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। हालांकि उनके साथ 44 हजार रुपये की ठगी हुई, लेकिन घटना का तरीका हैरान करने वाला है। उनके पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बीएसए बताया और तत्काल 44 हजार रुपये की मदद मांगी। सेवानिवृत्त अधिकारी पैसे भेजने लगे तो उनके कमांडेंट बेटे ने पूछताछ की और इसे साइबर ठगी बताते हुए पैसा भेजने से मना किया। इसके बावजूद अधिकारी ने बेटे की बात नहीं मानी और उसे डांटकर चुप करा दिया। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब फोन नंबर बंद हो गया तो उन्हें ठगी का पता चला।