फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोनोपोल हादसा: आठ घंटे की जांच खोलेगी लापरवाही की परतें

विज्ञापन
यहीं से टूटकर गिरा पोल। अमर उजाला
विज्ञापन
नोएडा। सेक्टर-121 पर्थला गोलचक्कर के पास मंगलवार दोपहर एक कार पर 132 केवी की हाईटेंशन लाइन का मोनोपोल गिरने के बाद दूसरे दिन भी जांच की गई। लखनऊ मुख्यालय की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी बृहस्पतिवार को नोएडा पहुंची। करीब आठ घंटे की जांच के दौरान हाईटेंशन लाइन लगाने वाली कंपनी से लेकर पोल के उपकरण बनाने वाली कोलकाता की कंपनी को भी जांच के दायरे में लाने की कार्रवाई की गई। टूटे पोल के नमूने एकत्रित करने का काम शुरू कर दिया गया है। शुक्रवार को इन्हें जांच के लिए दिल्ली की श्रीराम टेस्टिंग लैब भेजा जाएगा।
विज्ञापन

मुख्यालय से गठित जांच टीम का नेतृत्व आगरा के चीफ इंजीनियर आरके मिश्रा ने किया। उनके साथ लखनऊ के अधीक्षण अभियंता अखिलेश और मेरठ के अधीक्षण अभियंता जितेंद्र कुमार भी थे। सुबह करीब 9 बजे जांच कमेटी सीधे घटनास्थल पर पहुंची। इसके बाद टूटे पोल और साइट का जायजा लिया गया। सेक्टर-67 से सेक्टर-123 बिजली घर को जोड़ने के लिए करीब चार करोड़ रुपये की लागत से 15 मोनोपोल लगाए जा रहे हैं, इन्हें लगाने का काम कर रही कंपनी के कर्मचारियों और अधिकारियों के भी बयान दर्ज किए गए।
सभी पोल का मौके पर निरीक्षण किया गया। जहां हादसा हुआ, उसके नजदीक के तीन पोल को संवेदनशील मानते हुए इनकी गहनता से जांच की गई। मौका मुआयना करने के बाद दोपहर तीन बजे जांच टीम उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीटीसीएल) के सेक्टर-20 स्थित कार्यालय पर पहुंची। यहां सभी अधिकारियों और संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर हादसे की बिंदुवार जानकारी जुटाई गई।
विज्ञापन

पोल जिस स्थान पर लगा था उसका आधार कितना मजबूत था, इसकी भी जानकारी जुटाई गई। कोलकाता की कंपनी स्कीपर देश-विदेश में पोल के उपकरण सप्लाई करती है। इनकी गुणवत्ता का पता लैब से जांच रिपोर्ट आने के बाद लगाया जा सकेगा। पोल लगाने के दौरान किसी तरह की लापरवाही तो नहीं बरती गई, इसेे लेकर भी संबंधित एजेंसी और अधिकारियों से पूछताछ की गई। साथ ही, डिजाइनिंग में किसी तरह की खामियां तो नहीं थी, इस पहलू को भी जांच में शामिल किया गया है। शाम करीब पांच बजे जांच टीम लौट गई।
जून में दौड़ता करंट, तब हादसा होता तो मचता हाहाकार
अधिकारियों ने बताया कि हाईटेंशन लाइन के मोनोपोल का गिरना साधारण घटना नहीं है। शासन स्तर से इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए दो कमेटियां गठित की गई हैं। चीफ इंजीनियर मेरठ के निर्देश पर जांच कमेटी बुधवार को आई थी, जबकि लखनऊ मुख्यालय के निर्देश पर बृहस्पतिवार को जांच हुई। इस नवनिर्मित लाइन को जून में शुरू किया जाना था। अगर उस समय हादसा होता तो स्थिति संभाले नहीं संभलती। हाहाकार मचना तय था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें