डीएमआरसी ने 500 मिलियन यूनिट ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम बढ़ाया
योजना के तहत मेट्रो अपने कुल बिजली उपभोग का अधिकांश हिस्सा हरित स्रोतों से प्राप्त करेगी
33% नवीकरणीय ऊर्जा का हो रहा इस्तेमाल
60% से अधिक करने का लक्ष्य रखा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो अब और अधिक हरित व पर्यावरण हितैषी बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने संचालन के लिए 500 मिलियन यूनिट (एमयू) नवीकरणीय ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। यह कदम न केवल डीएमआरसी की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगा बल्कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों में भी अहम भूमिका निभाएगा। डीएमआरसी का लक्ष्य यात्रियों को स्वच्छ, निर्बाध और टिकाऊ परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
डीएमआरसी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अनुज दयाल ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा की यह आपूर्ति भारत में कहीं भी ग्रिड से जुड़े कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) के जरिये की जाएगी। इसके लिए एक सौर ऊर्जा डेवलपर का चयन किया जाएगा जो दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में डीएमआरसी को प्रतिवर्ष 500 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति करेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य डीएमआरसी के कुल ऊर्जा में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी को मौजूदा 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत से अधिक करना है। यह लक्ष्य दिल्ली मेट्रो के फेज-चार नेटवर्क के विस्तार को ध्यान में रखकर तय किया गया है। योजना के तहत मेट्रो अपने कुल बिजली उपभोग का अधिकांश हिस्सा हरित स्रोतों से प्राप्त करेगी। मौजूदा समय में डीएमआरसी अपनी बिजली आवश्यकता का बड़ा भाग पहले से सौर ऊर्जा से पूरा कर रही है। मेट्रो प्रति वर्ष मध्यप्रदेश के रीवा सोलर पार्क से लगभग 350 मिलियन यूनिट बिजली प्राप्त कर रही है।
इसके अलावा दिल्ली मेट्रो के विभिन्न स्टेशनों, डिपो और आवासीय परिसरों की छतों पर लगे सोलर प्लांट से करीब 40 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इस प्रकार डीएमआरसी के कुल बिजली उपभोग में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 33 प्रतिशत है। वहीं, दिन के समय परिचालन के दौरान यह हिस्सा 65 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
कार्बन उत्सर्जन में आएगी कमी
डीएमआरसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमारा लक्ष्य आने वाले कुछ वर्षों में अपने संचालन को लगभग पूरी तरह हरित ऊर्जा पर आधारित बनाना है। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी बल्कि दीर्घकाल में परिचालन लागत भी घटेगी। दिल्ली मेट्रो देश की पहली ऐसी मेट्रो परियोजना बनने जा रही है जो 60 प्रतिशत से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होगी।
25 वर्ष के लिए होगा समझौता
परियोजना की पूर्णता अवधि कार्य आवंटन की तिथि से 15 महीने तय की गई है जबकि बिजली खरीद समझौते (पीपीए) की अवधि 25 वर्ष होगी। बोली प्रक्रिया सरकारी मानदंडों के अनुसार पूरी की जाएगी। यह परियोजना भारत सरकार की पंचामृत रणनीति के अनुरूप है जिसे ग्लासगो में आयोजित सीओपी-26 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रस्तुत किया था। इस रणनीति के तहत भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने, 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने का संकल्प लिया है। वर्ष 2017 में रीवा सोलर पार्क से बिजली लेने के बाद दिल्ली मेट्रो देश की पहली ऐसी संस्था बनी थी, जिसने बाहरी सौर स्रोत से बिजली खरीदने का अनुबंध किया था। अब यह नई परियोजना उस दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी
डीएमआरसी के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने से मेट्रो का कार्बन फुटप्रिंट काफी घटेगा। अनुमान है कि नई परियोजना के लागू होने से प्रतिवर्ष लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे न केवल दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि राजधानी को जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद मिलेगी।