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मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की मौत का आरोप

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पुन्हाना। जिले के शहीद हसन खां मेवाती मेडिकल कॉलेज में आए दिन डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की मौत के मामले सामने आ रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि पांच-पांच दिन तक संक्रमित मरीजों का न तो कोई चेकअप किया जा रहा है और न ही उनकी देखभाल की जा रही है।
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आरएसएस से जुड़े एवं पुन्हाना मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन उमेश आर्य ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर मरीजों की देखभाल में लापरवाही बरत रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने शनिवार को कॉलेज की निदेशक संगीता और भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र पटेल को शिकायत दी है। उन्होंने बताया कि करीब पांच दिन पहले तावडू से उनका बहनोई मेडिकल कॉलेज नल्हड़ में भर्ती हुआ था। उस समय उसकी हालत काफी अच्छी थी। लेकिन, मेडिकल कॉलेज में पिछले पांच दिनों से बहनोई का न तो कोई चेकअप किया गया और न ही समुचित इलाज मुहैया कराया जा रहा है। इस कारण उसकी हालत ज्यादा खराब हो गई है। इस बारे में उन्होंने निदेशक से शिकायत की तो पता चला कि बहनोई को अब आईसीयू में भर्ती करना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उनके बहनोई की हालत गंभीर हुई है। जबकि, सरकार लोगों की हर संभव मदद कर रही है।
वहीं, पुन्हाना निवासी हरियाणा प्रदेश अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश प्रचार सचिव उमेश अग्रवाल ने बताया कि उनके ताऊ हथीन में रहते हैं। उनकी बेटी पूनम संक्रमित थी। 6 मई को उसे नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। आरोप है कि पूनम को डॉक्टरों ने बिना जांच पड़ताल किए ऑक्सीजन मशीन लगा दी। करीब 5 घंटे बाद पता चला कि मशीन खराब थी, तब तक उसकी हालत काफी खराब हो चुकी थी। परिजनों के शोर मचाने पर डॉक्टरों ने जांच की और दूसरी मशीन लगाई। इसके बावजूद भी डॉक्टरों ने उसका सही से इलाज नहीं किया और उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि पूनम की मौत के जिम्मेदार डॉक्टर ही हैं। उमेश का कहना है कि लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ उपायुक्त और सीएम मनोहर लाल को शिकायत भेजी है।
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इसके अलावा मेवात पुलिस के पीआरओ कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों को रुपये न देने की वजह से उनके एक नौजवान रिश्तेदार की मौत हो गई। जरूरत पड़ने पर भी डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर नहीं रखा। गांव चहालका के पूर्व सरपंच छोटे ने आरोप लगाया है कि मेडिकल कॉलेज में सही उपचार न मिलने के कारण उनके नवासा मौसिम खान एडवोकेट की मौत हो गई। एक अन्य मामले में पिनगवां खंड के गांव झारपुड़ी में भी संक्रमित पप्पू की मौत हो चुकी है। इस मामले में भी परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पिनगवां निवासी एक युवक ने 52 वर्षीय मां की मौत का जिम्मेदार मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को ठहराया है।
शिकायतें मिलने पर होगी जांच
जिला उपायुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने बताया कि पुलिस पीआरओ के रिश्तेदार की मौत की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज की निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेज दिया है। इसके अलावा अन्य कोई शिकायतें आएंगी तो उनकी भी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि लापरवाही से किसी भी मरीज की मौत होने नहीं दी जाएगी। अगर किसी डॉक्टर की लापरवाही के कारण मरीज की मौत होती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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