फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एमसीडी उपचुनाव : भाजपा में 11 वार्डों में टिकट के लिए लंबी लाइन

विज्ञापन
विज्ञापन
-स्थानीय व बाहरी नेता आमने-सामने, पूर्व पार्षद भी दौड़ में, चांदनी महल वार्ड में नहीं मिला उम्मीदवार
विज्ञापन

विनोद डबास
नई दिल्ली। एमसीडी के 12 वार्डों के उपचुनाव ने राजधानी की सियासत को गर्मा दिया है। टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा, आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस में जबरदस्त खींचतान चल रही है। मगर सबसे दिलचस्प स्थिति भाजपा के भीतर दिखाई दे रही है, जहां 11 वार्डों में टिकट मांगने वालों की कतारें लगी हैं, जबकि चांदनी महल वार्ड से कोई भी उम्मीदवार मैदान में उतरने को तैयार नहीं है।
भाजपा के लिए यह उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। दरअसल 12 में से नौ वार्ड पहले उसके पास थे और पार्टी इन सीटों को फिर से जीतकर यह दिखाना चाहती है कि दिल्ली की जनता अभी भी उसके साथ है। लेकिन टिकट वितरण ने पार्टी नेतृत्व की नींद उड़ा दी है। प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा और संगठन महामंत्री पवन राणा के पास अधिकतर वार्डों में स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं के अलावा दूसरे इलाके के नेता भी टिकट मांगने पहुंचे है। इन नेताओं में पूर्व पार्षद, पहले चुनाव लड़ चुके नेता और वरिष्ठ नेताओं के रिश्तेदार शामिल हैं। इस प्रकरण से स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। कुछ वार्डों में टिकट के दावेदार बाहरी नेताओं का कड़ा विरोध कर रहे है। उन्होंने पार्टी नेताओं को सचेत किया है कि अगर बाहरी या पैराशूट उम्मीदवार उतारे गए तो प्रचार में इलाके के नेताओं व कार्यकर्ताओं का सहयोग नहीं मिलेगा। इस तरह भाजपा में “स्थानीय व बाहरी” की जंग स्पष्ट रूप से दिखने लगी है।
विज्ञापन


चांदनी महल वार्ड से कोई नहीं लड़ना चाहता चुनाव
भाजपा मेंं 11 वार्डों में टिकट के लिए होड़ मची है, वहीं चांदनी महल वार्ड से कोई भी दावेदार आगे नहीं आया है। बताया जा रहा है कि यह वार्ड भाजपा के लिए पिछले कई चुनावों से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यहां के स्थानीय समीकरण और मतदाताओं का जातीय-सामाजिक संतुलन भाजपा के पारंपरिक समर्थन आधार से मेल नहीं खाता। पिछले चुनावों में भी इस वार्ड में भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी। अब पार्टी नेतृत्व स्थानीय संगठन से संभावित चेहरा तलाशने में जुटा है, लेकिन अभी तक किसी ने खुलकर रुचि नहीं दिखाई है।
विज्ञापन


अंदरूनी गुटबाजी से चुनौती
भाजपा इस बार सेवा, स्थायित्व और संगठन के नारे के साथ चुनाव में उतर रही है और उपचुनावों को रेखा गुप्ता सरकार की पहली बड़ी परीक्षा के रूप में देख रही है। वहीं 11 वार्डों में टिकट को लेकर भीड़ में शामिल नेताओं ने संगठन में अपनी पुरानी भूमिका और चुनावी योगदान को हथियार बना रखा है। ऐसे नेताओं का कहना है कि अगर मेहनती लोगों को मौका मिला तो पार्टी की स्थिति और मजबूत होगी। अगर नेताओं के परिजन या बाहरी लोग थोपे गए और पहले विफल हो चुके नेताओं को अवसर मिला तो नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें