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यमुना एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा में खामी केस में आइआरपी गिरफ्तार, हादसे में सात लोगों की गई थी जान

Tue, 02 Mar 2021 01:49 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
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यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा क्षेत्र में हुए हादसे में सात लोगों की मौत के बाद यमुना प्राधिकरण की तहरीर पर पुलिस ने जेपी इंफ्राटेक, उसके इनसॉल्वेंसी रिसोल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) व यमुना एक्सप्रेसवे के संचालन व रखरखाव के लिए बनी समिति (आईएमसी) के खिलाफ बीटा-2 थाने में केस दर्ज किया था। 

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यमुना प्राधिकरण के अधिकारी इस मामले में लगातार फीडबैक ले रहे थे। इस मामले में पुलिस ने नामजद आईआरपी को मुंबई के मालावार हिल पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अशोका अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया। आरोपी को बीटा-2 थाना पुलिस ग्रेटर नोएडा लेकर आई है और उसे अदालत में पेश किया जा रहा है।

बुधवार देर रात यीडा सीईओ के आदेश पर वरिष्ठ प्रबंधक विशेष त्यागी की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई थी। डीसीपी ग्रेटर नोएडा राजेश कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ धारा-283, 431 व 7 के अंतर्गत केस दर्ज किया गया था। मामले में आईआरपी अनुज जैन की गिरफ्तारी के लिए गुरुग्राम स्थित दफ्तर में दबिश दी गई थी, लेकिन वह फरार हो गया है। पुलिस तलाश कर रही है। 
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बता दें कि यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा जिले में मंगलवार को हुए हादसे में कार सवार सात लोगों की मौत हो गई थी। यमुना प्राधिकरण का मानना है कि अगर इस जगह सेंट्रल वर्ज पर क्रैश बैरियर लगे होते तो यह हादसा टल सकता था। यमुना प्राधिकरण का कहना है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर हो रहे हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सेफ्टी ऑडिट कराई गई थी। जिसमें कई सुझाव दिए गए थे। 

अहम है कि दिवालिया होने पर जेपी इंफ्राटेक का बोर्ड भंग हो गया। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल ने कंपनी में आईआरपी अनुज जैन को नियुक्त किया। सुरक्षा उपायों को पूरा कराने के लिए आईआरपी से कई बार बात की गई। हर बार आश्वासन दिया गया।

आईआईटी दिल्ली ने कई सुरक्षा उपायों को अपनाने की सलाह दी थी
यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा जिले में मंगलवार को हुए हादसे में कार सवार सात लोगों की मौत हो गई थी। यीडा का मानना है कि अगर इस जगह सेंट्रल वर्ज पर क्रैश बैरियर लगे होते तो हादसे को रोका जा सकता था। यीडा ने आए दिन हो रहे हादसों के लिए आईआरपी अनुज जैन और गठित की गई प्रबंधन समिति को दोषी माना है। बीते चार जनवरी को भी बैठक हुई, लेकिन इन सुझावों पर अमल नहीं किया गया। प्राधिकरण के पूछने पर हर बार लापरवाही बरतते हुए कोई न कोई बहाना बनाकर टालमटोल कर दिया गया।
 

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बोर्ड भंग होने के बाद नियुक्त किया था आईआरपी
थाना बीटा-2 में दी गई तहरीर में प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक व यमुना एक्सप्रेसवे के नोडल अधिकारी वीके त्यागी ने कहा है कि एक्सप्रेसवे का संचालन करने वाली कंपनी के एनसीएलटी में जाने से जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड का बोर्ड भंग हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए अनुज जैन को आईआरपी नियुक्त कर दिया। साथ ही प्रबंधन समिति गठित कर दी थी। अब कामकाज यही देख रहे हैं।

...तो रोका जा सकता था हादसा
अगर एक्सप्रेसवे से मिल रहे टोल के पैसे ही सुरक्षा उपायों में लगाए जाते तो भी इस तरह के हादसों को रोका जा सकता था। तहरीर में बताया गया है कि मंगलवार रात मथुरा जिले में जो हादसा हुआ है, अगर डिवाइडर में क्रैश बैरियर लगे होते तो गाड़ी दूसरी लेन में नहीं जाती। ऐसे में हादसा रुक सकता था। यह यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

आईआईटी ने दिए थे ये सुझाव
यमुना एक्सप्रेसवे की सेफ्टी ऑडिट करने के बाद आईआईटी दिल्ली ने एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ एंट्री व एग्जिट प्वाइंट पर रंबल स्ट्रिप लगाने और एक्सप्रेसवे पर दिशा सूचक बोर्ड की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया था। साथ ही सेंट्रल वर्ज पर मेटल बैरियर लगाने की सलाह दी गई थी। जिससे वाहन चालक एक तरफ से दूसरी तरफ नहीं जा सकें। इसके अलावा साइड बैरियर की ऊंचाई बढ़ाने, लेन खत्म करने, लचीले क्रैश बैरियर लगाने और चालान सिस्टम को दुरुस्त करने की सलाह दी गई थी।
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