नोएडा। विश्व भारती स्कूल से सेक्टर-61 तक बने एलिवेटेड रोड की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद इसकी जांच तेज कर दी गई है। प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी व वित्त नियंत्रक ने निर्माण कंपनी को अनियमित तरीके से 17 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान की जांच शुरू कर दी है। जांच के दायरे में इंजीनियरिंग और वित्त विभाग के कई और अधिकारी आ गए हैं, जिनकी आने वाले दिनों में परेशानी बढ़ सकती है।
एलिवेटेड रोड परियोजना का कैग ने भी वित्तीय ऑडिट किया था। जिसमें 415.17 करोड़ की इस परियोजना के निर्माण पर 468.90 करोड़ रुपया खर्च करने की बात सामने आई थी। जनवरी 2019 में टेकभनीकल ऑडिट सेल अंतिम बिल जमा करने से पहले ही कंपनी को 17.21 करोड़ रुपये के भुगतान की वित्तीय अनियमितता सामने आई। नियमानुसार 10 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान से पहले ऑडिट सेल के अलावा अधिकारियों की अनुमति की जरूरत होती है। लेकिन इस मामले में नियमों को दरकिनार कर भुगतान किया गया। कैग की आपत्ति और ऑडिट सेल की रिपोर्ट के आधार पर कंपनी से रिकवरी की जानी हैं। एलिवेटेड रोड के निर्माण की गुणवत्ता की जांच आईआईटी दिल्ली को सौंपी गई थी। वित्तीय अनियमितता की जांच प्राधिकरण अफसरों ने अपने स्तर पर भी शुरू कर दी है। इंजीनियरिंग व वित्त विभाग के जिन अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं उनसे भी जवाब तलब किया जा रहा है।