नगीना। जिले का गिरता जल स्तर चिंता का विषय बना हुआ है वहीं बरसात में भारी मात्रा में जल को बर्बाद होने दिया जा रहा है। जिस पर ग्रामीणों ने चिंता जाहिर की है। दरअसल हरियाणा की सबसे बड़ी प्राकृतिक कोटला झील बरसात के जल संरक्षण का अच्छा विकल्प है लेकिन सरकार इसके विस्तार को लेकर चिंतित नहीं है।
केंद्र और राज्य सरकार की टीम इसका विस्तार करने के लिए बीते वर्ष मुआयना करके गई लेकिन कोई निचोड़ नहीं निकला। यही कारण है कि 108 एकड़ भूमि अधिग्रहण के पहले चरण में लगाई गई दीवार के चारों तरफ 1000 एकड़ से अधिक भूमि पर बरसात का पानी फैला हुआ है। अगर दायरा बढ़ा दिया जाता तो इस पानी का भी संरक्षण हो जाता। इससे बरसात नहीं होने पर कि सानों को यहां से सिंचाई का प्रबंध हो सकता था।
किसान जाकिर हुसैन ने बताया कि सन 1838 में कोटला झील में अरावली पहाड़ियों से बह कर इतना पानी भर गया था कि तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत को संगेल, उजीना, जयसिंहपुर आदि गांवों में बांध बनाने पड़े थे। वहीं, 1977 व 1996 में रावली व कामेडा बांध टूटने से राजस्थान का पानी भी कोटला झील में आ गया था। जिससे आकेडा, भूड़बास, महूं-जलालपुर और खानपुर नूंह आदि गांवों में 8 से 10 फुट पानी भर गया। हजारों घर डूब गए। मेवात में सिंचाई की समस्या को खत्म करने के लिए कोटला झील के विकास की मांग लंबे समय से चल रही है। जननायक जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष मोहसिन चौधरी ने बताया कि गठबंधन सरकार कोटला झील के विस्तार को लेकर गंभीर है, आगामी कार्ययोजना तैयार कर रही है।
किसानों का विकास होगा संभव
आकेडा गांव के सरपंच सुरेश, इशाक, आस मोहम्मद ने बताया कि मेवात क्षेत्र की जीवन रेखा कोटला झील 5000 एकड़ भूमि में फैली हुई है। गांव कोटला के अलावा कंसाली, भूड़बास, मुलथान, महूं, जलालपुर नूंह, खानपुर नूंह, आकेड़ा, मेवली आदि गांवों की भूमि झील में आती हैं। झील का दायरा बढ़ाए जाने से किसानी का विकास होगा। हसन बसरी बताती है कि कोटला झील का विस्तार नहीं किए जाने से लोगों ने हरियाणा सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है।
विस्तार के फायदे।
- बड़े स्तर पर खेतों की सिंचाई।
- पानी को फिल्टर कर पीने में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- बड़े स्तर पर मछली पालन हो सकता है।
- पर्यटक स्थल आसानी से बनाया सकता है।
- बिजली बनाई जा सकती है।
- झील से कच्चे नालों में पानी छोड़कर दूर तक सिंचाई कराई जा सकती है।
फोटो कोटला झील में 108 एकड़ भूमि पर बने जलाशय के बाहर भरा बरसात का पानी।
डैम में एकत्रित किया जा रहा है पानी
नूंह। जल शक्ति अभियान के तहत मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कोटला झील के टूटे चेक डैम को ठीक कराया है। मानसून के आने से बारिश इकट्ठा किया जा रहा है। इस पानी को अत्यधिक गर्मी के मौसम में प्रयोग किया जा सके। उपायुक्त ने जिला वासियों से अपील की है कि वे अपने परिवार जनों, मित्रों और आस-पड़ोस के लोगों को भी जल के विवेकपूर्ण उपयोग और उसे व्यर्थ न बहाने के लिए प्रेरित करें।