फोटो 01 अपने बुटिक में सिलाई करती अनीता देवी। संवाद
नारनौल। हाथ का हुनर कब और कहां काम आ जाए कुछ नहीं पता। इसी का उदाहरण शहर के केशव नगर की गली नंबर एक में देखने को मिला। यहां रहने वाली अनीता देवी ने परिस्थितियों के हाथों मजबूर होकर घर से ही सिलाई का काम शुरू किया और अपनी मेहनत व लगन के बल पर आज अपना बुटिक तो शुरू किया ही, साथ ही 10 महिलाओं को भी राेजगार दिया है। अब हर माह 30 से 40 हजार की बचत हो जाती है।
साल 1977 में एक जमींदार के घर में जन्मी अनीता कुल 10 भाई बहन है। अनीता को बचपन से ही पुराने कपड़ों को लेकर उनकी सिलाई करने का शौक था। उस वक्त उनको नहीं पता था कि उसका यही शौक एक दिन उनकी जिंदगी को बेहतर बनाने वाला है।
नारनौल में शादी होकर आई अनीता के पति एक दुकान पर सेल्समैन का काम करते हैं। घर की माली हालत अच्छी नहीं होने के चलते अनेकों बार मन मसोस कर भी रहना पड़ा।
अनीता का मानना है कि लड़कियों को कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए, क्यों कि हाथ का हुनर भले ही बहुत ज्यादा कमा कर न दे पाए लेकिन किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने देगा। ऐसे में आप खुद तो आत्मनिर्भर बनेंगी ही बल्कि परिवार के गुजर बसर में भी योगदान दे पाएंगी।
अनीता की एक बेटी व एक बेटा है, बेटी भी सिलाई का काम बखूबी जानती है और उसकी अच्छे घर में शादी भी कर दी है। बेटा आईटीआई कर रहा है। अनीता का कहना है कि अब खुद का एक बड़ा बुटिक व बच्चों को कामयाब करना ही उसका मकसद है।
घर से की शुरूआत
ऐसे में दो बच्चों की मां अनीता ने घर से ही सिलाई करना शुरू किया। हालांकि शुरू में काम इतना नहीं मिलता था लेकिन उसकी हाथों की सफाई देखकर जो भी उनसे कुछ सिलवाकर जाता वह लौटकर उन्हीं के पास ही आता। ऐसे में धीरे धीरे काम बढ़ता गया और जीवन आसान होता चला गया।
किराये पर ली दुकान
अनीता ने घर के पास ही केशव नगर में साल 2000 में एक दुकान किराए पर ली। इस दौरान उन्होंने गरीब परिवार की 18 लड़कियों को मुफ्त में अपने हुनर की कला भी सिखाई। आज अनीता के साथ पांच महिलाएं सिलाई का काम करती हैं और अन्य पांच महिलाएं अपने अपने घर से काम कर रही हैं।