कहासुनी होनेे पर 2011 में युवक की गोली मारकर की थी हत्या
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश सोमप्रभा मिश्रा की अदालत ने 2011 में हुई हत्या के मामले में मुख्य आरोपी दनकौर निवासी लोकेन्द्र को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, सह-आरोपी दनकौर निवासी तिलक चंद को आर्म्स एक्ट में दोषी करार देते हुए तीन वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वारदात 15 दिसंबर 2011 की है।
वादी भंवर सिंह के अनुसार वह श्यामनगर मंडी से अपने गांव राजपुर कलां जा रहा था। रास्ते में रणवीर जमालपुर के खेत के पास मोड़ पर उसे लोकेन्द्र और दो अन्य अज्ञात व्यक्ति खड़े मिले जिनसे उनकी कहासुनी हो गई। इसी दौरान उनका भतीजा शहजाद बाइक पर वहां आ गया और उससे भी गाली गलौज हो गई। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। मामले में दनकौर कोतवाली ने लोकेन्द्र और तिलक चंद के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। इसके अतिरिक्त दोनों आरोपियों के खिलाफ आयुध अधिनियम की धारा-25 के तहत भी अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे।
पुलिस ने मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर इनके पास से तमंचा और कारतूस बरामद किए थे। करीब 14 साल चले इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में 13 गवाह पेश किए गए। प्रमुख गवाह भंवर सिंह ने अदालत में बताया कि उसके सामने ही लोकेन्द्र ने भतीजे शहजाद पर गोली चलाई थी। आरोपी ने तमंचे से 4-5 गोलियां मारी थीं। वहीं, डॉ संतराम वर्मा ने कोर्ट में बयान दिए कि मृतक के शरीर पर गोली के निशान थे जिस कारण उसकी मौत हुई थी।
प्रत्यक्षदर्शी का बयान और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनी सजा का आधार
न्यायाधीश ने अपने निर्णय में कहा कि मुख्य गवाह भंवर सिंह का बयान विश्वसनीय है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी इसकी पुष्टि होती है। इस कारण लोकेंद्र को दोषी को करार दिया गया। हालांकि, तिलक चंद के खिलाफ सामान्य आशय (धारा 34) के तहत हत्या का आरोप साबित नहीं हो सका लेकिन आरोपी को कोर्ट ने आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी माना है। न्यायाधीश ने सजा सुनाते हुए कहा कि भले ही विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट से पूर्ण मेल न खाए लेकिन प्रत्यक्षदर्शी गवाह का विश्वसनीय बयान और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह साबित होता है कि हत्या गोली मारकर की गई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मात्र इस आधार पर कि बरामद हथियार और घटनास्थल के साक्ष्य में पूर्ण मेल नहीं खाते अभियोजन पक्ष कमजोर नहीं हो जाता।