- देश में पहली बार इस खास तकनीक का हो रहा है निर्माण में इस्तेमाल
-40% तक कार्बन उत्सर्जन करता है कम
-25% उत्पादन लागत के कारण किफायती
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुना सिटी। नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट भारत का पहला बड़ा अवसंरचना प्रोजेक्ट है, जिसकी इमारतें और ढांचे एलसी 3 तकनीक से तैयार हो रहे हैं। एलसी 3 यानी लाइमस्टोन कैल्साइंड क्ले सीमेंट एक खास तरह के कम कार्बन वाला सीमेंट है, जो पारंपरिक पोर्टलैंड सीमेंट की तुलना में लगभग 40% तक कम कार्बन उत्सर्जन करता है।
एलसी 3 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उत्पादन में लगभग 25% सस्ता है, इसमें साधारण चूना पत्थर और क्ले का इस्तेमाल होता है। इसे केवल 800°C तापमान पर तैयार किया जा सकता है, जबकि पारंपरिक सीमेंट 1450°C पर तैयार होता है। मजबूती और टिकाऊपन में भी यह पारंपरिक सीमेंट से कम नहीं है। प्रारंभिक चरण में एयरपोर्ट में 1 रनवे और 1 टर्मिनल हो चुका है जिसकी सालाना क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों के लिए होगा।
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10 वर्षों तक चला शोध
इस तकनीक को विकसित करने में आईआईटी दिल्ली और मद्रास, स्विस डेवलपमेंट कोऑपरेशन (एसडीसी), ईपीएफएल (स्विट्जरलैंड), तारा और यूसीएलवी (क्यूबा) के वैज्ञानिकों ने वर्ष 2013–2023 लगभग 10 वर्ष तक शोध कार्य किया, जिसके बाद इसे विकसीत किया गया है।
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दुनिया के लिए नया मानक
नोएडा एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय और टिकाऊ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एलसी3 के उपयोग से हम न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया को एक नया मानक दे रहे हैं।
-निकोलस शेंक, मुख्य विकास अधिकारी, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट