परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा केवल डाटा के आधार पर रूट तय करना पर्याप्त नहीं है
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में बस सेवा को और ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए अब जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के अनुभव का सहारा लिया जाएगा। लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने ड्राइवरों, कंडक्टरों और बस डिपो प्रबंधकों के सुझावों को रूट रेशनलाइजेशन प्रक्रिया में शामिल करने का फैसला किया है। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि बस नेटवर्क को भी वास्तविक जरूरतों के अनुसार ढाला जा सकेगा।
परिवहन विभाग की हालिया समीक्षा बैठक में परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि केवल डाटा के आधार पर रूट तय करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी अनुभव को भी महत्व देना जरूरी है। वर्तमान में रूट रेशनलाइजेशन का विस्तृत अध्ययन आईआईटी दिल्ली द्वारा किया जा रहा है। इस अध्ययन के तहत पूर्वी दिल्ली में 121, पश्चिमी दिल्ली में 181 और उत्तरी दिल्ली में 194 रूट का आकलन किया जा चुका है, जबकि दक्षिणी दिल्ली में यह प्रक्रिया जारी है। अगले दो महीनों में यह अध्ययन पूरा होने की उम्मीद है।
चार नए रूट पर इंटर-स्टेट इलेक्ट्रिक बस चलाएगी डीटीसी...
डीटीसी दिल्ली से रेवाड़ी, दिल्ली से करनाल, दिल्ली से अलवर और दिल्ली से जेवर के नए रूट पर इलेक्ट्रिक बस सेवा की जल्द ही शुरुआत करेगी। मंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए बस सेवाएं शुरू करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है, ताकि नागरिकों को सुविधाजनक और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा का विकल्प उपलब्ध हो सकें।