जागरूकता की कमी से पनप रहा लार्वा
-विश्व मच्छर दिवस पर फेलिक्स अस्पताल में कार्यक्रम आयोजित
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। विश्व मच्छर दिवस के अवसर पर रविवार को सेक्टर-137 स्थित फेलिक्स अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डीके गुप्ता ने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण लार्वा पन रहा है। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने और परिवार की सेहत के लिए कुछ आसान और उपयोगी कदम उठाएं।
मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से मलेरिया की बीमारी होती है। इस रोग में व्यक्ति के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं संक्रमित हो जाती हैं और खत्म होने लगती हैं। रोगी को सर्दी और सिरदर्द के साथ ही बार-बार कभी कम तो कभी ज्यादा बुखार आता है। गंभीर मामलों में बीमार व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है, यहां तक कि उसकी मौत भी हो सकती है। पीला बुखार एक विशेष प्रकार के मच्छर से फैलने वाला वायरल संक्रमण है। पीले बुखार में मरीज के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में सूजन आ जाती है। कम गंभीर मामलों में सिरदर्द, जी मिचलाना, बुखार और उल्टी जैसे लक्षण दिखते हैं। गंभीर मामलों में दिल, लिवर और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
वहीं, चिकनगुनिया मच्छरों से फैलने वाली एक आम, लेकिन घातक बीमारी है। इस रोग में मरीज को बुखार, चकत्ते और जोड़ों में दर्द की शिकायत होती है। संक्रमण ठीक हो जाने के बाद भी इसके लक्षण लंबे समय तक रहते हैं और मरीज के शरीर को कमजोर कर देते हैं। इससे उसे चलने-फिरने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मरीज को पूरी तरह से आराम की जरूरत होती है। जीका वायरस मच्छरों के काटने से फैलने वाली बेहद घातक बीमारी है। इसमें बुखार, लाल चकत्ते, जोड़ों और मासपेशियों में दर्द की शिकायत रहती है। इसके अन्य लक्षणों में सिरदर्द, कंजेक्टिवाइटिस और बेचैनी भी होती है। अगर कोई गर्भवती महिला इससे संक्रमित होती है तो उसके बच्चे का दिमाग छोटा रह सकता है। डेंगू वायरस संक्रमित मच्छर के काटने से होता है। इस बीमारी में मरीज को बुखार, चकत्ते, जोड़ों और मासपेशियों में गंभीर दर्द जैसे लक्षण अनुभव होते हैं। इस बीमारी के दौरान मरीज को आराम की जरूरत होती है और इसकी वजह से मरीज महीनों तक चलने-फिरने में दर्द का अनुभव करता है। इनसे बचने के लिए घर के अंदर अधिक समय बिताएं, खासकर दिन के समय, ताकि मच्छरों के काटने से बचा जा सके। पानी जमा न होने दें।