नूंह। अस्सी के दशक में बने रोजकामेव औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाओं का अभाव है। सरकार लंबे समय से इसकी अनदेखी कर रही है। वर्षों पूर्व प्रदेश सरकार ने लोगों को आईएमटी रोजका मेव का सपना दिखाकर करीब 1600 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था, लेकिन आज तक इसे विकसित नहीं किया गया। बिजली, पानी, सड़क, सीवर लाइन, स्ट्रीट लाइट समेत अन्य आधुनिक सुविधाएं नहीं होने से उद्योगपतियों को काम करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि करीब 9 गांवों की 1600 एकड़ जमीन का मुआवजा एनसीआर क्षेत्र के मुताबिक देने की बात कही गई थी। किसानों ने इसके लिए धरना भी दिया था। बाद में सरकार ने किसानों की मुआवजा राशि बढ़ा दी थी। नवंबर 2016 में सरकार ने स्थानीय नेताओं और प्रशासन के साथ मिलकर किसानों को जबरन धरने से खदेड़ा भी था।
लंबे समय से विकास की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को सिर्फ मायूसी ही हाथ लगी है। जिले में युवाओं के रोजगार के कम संसाधन होने से लगातार बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। इसी कारण कई युवा अपने रास्ते से भटक दूसरे गलत रास्तों पर जा रहे हैं। आईएमटी के पास से गुजर रहे केएमपी एक्सप्रेसवे और एनसीआर के साथ लगते रोजकामेव क्षेत्र औद्योगिक क्षेत्र पर अगर सरकार ध्यान देती है, तो रोजगार के संसाधन बढ़ेंगे।
प्रशासन जिले की इस समस्या को लेकर गंभीर है। आने वाले समय में युवाओं को जिले में ही रोजगार दिए जाएंगे। जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
धीरेंद्र खड़गटा, उपायुक्त नूंह
हमारे सामने कई तरह की समस्या आ रही है। अगर सरकार हमारी समस्याओं पर ध्यान दें, तो यहां पर विकास की काफी संभावनाएं हैं। यहां पर बहुत सारे काम करवाने की जरूरत है।
रतनपाल खटाना, जनरल सचिव, मेवात चैंबर्स ऑफ कामर्स
कई बार सरकार के समक्ष यहां की समस्याओं को रखा गया। हर बार यहां के विकास का आश्वासन दिया जाता है। लेकिन यहां पर कोई कार्य नहीं किया गया।
आरएस खटाना, प्रेसिडेंट, मेवात चैंबर्स ऑफ कामर्स
जिले में कई औद्योगिक जोन के लिए सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है। जिले के युवा योग्यता बढ़ाने पर ध्यान दें, तकनीकी शिक्षा से ही उन्हें रोजगार मिलेगा।
बीएस डागर, उद्योगपति, सीईओ, एस्कॉर्ट्स लिमिटेड