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Noida News: बसों की कमी से बिगड़ी राजधानी की रफ्तार, यात्री परेशान

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चार माह में 998 पुरानी बसें हटने से सड़कों पर बढ़ा दबाव
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30 लाख से अधिक यात्रियों को झेलनी पड़ रही दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली।
त्योहारी सीजन में राजधानी की सड़कों पर भीड़ बढ़ रही है और बसों की भारी कमी का असर दिख रहा है। कुछ महीनों में सड़कों से करीब 998 पुरानी बसें हट चुकी हैं। वहीं, जनवरी से अब तक 2,820 बसें परिचालन से बाहर हो चुकी हैं। इससे रोजाना बसों पर निर्भर करीब 30 लाख से अधिक यात्रियों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
राजधानी में पांच साल बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब कुल बसों की संख्या घटकर 5,000 से नीचे आ गई है। एक वर्ष पहले तक राजधानी में 7,300 से अधिक बसें चल रही थीं लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 4,900 रह गई है। इनमें 2,287 बसें डीटीसी की और 533 डीआईएमटीएस (क्लस्टर) की हैं जो तकनीकी कारणों या अनुबंध समाप्त होने की वजह से बंद हो गईं।
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राजधानी में बसें हटने का सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ रहा है। कई इलाकों में बसों की आवृत्ति घटने से बस स्टॉप पर भीड़ बढ़ गई है। दफ्तर या स्कूल जाने वालों को सुबह-शाम लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई लोगों को ऑटो और टैक्सी का भी सहारा लेना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि पहले जहां 10–15 मिनट में बस मिल जाती थी अब कई बार आधा घंटे से भी अधिक इंतजार करना पड़ता है।
इधर, डीटीसी अधिकारियों का कहना है कि कुछ बसें तकनीकी खराबी और अनुबंध अवधि समाप्त होने के कारण हटाई गई हैं। वहीं, डीआईएमटीएस की 533 बसें इसलिए बंद करनी पड़ीं क्योंकि इनके टेंडर का नवीनीकरण नहीं हो सका।



सितंबर में हटीं 592 बसें

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की 591 सीएनजी बसें सितंबर में सड़कों से हटा दी गईं क्योंकि ये बसें चलने लायक नहीं थीं। अब डीटीसी के पास सिर्फ 149 सीएनजी बसें बची हैं। दिल्ली में डीटीसी की फिलहाल 2517 ई-बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं जिनमें 717 बसें 9 मीटर की और 800 बसें 12 मीटर की हैं। डीटीसी के अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर से पहले 9 मीटर की 323 देवी बसें लाने की तैयारी है। ये बसें लास्ट माइल कनेक्टिविटी को बढ़ाने में मदद करेंगी। इससे यात्रियों की समस्या भी दूर होगी। इस साल नवंबर व दिसंबर में क्रमश: 15 और 99 बसें सड़कों से हटाई जाएंगी।
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जरूरत से आधी भी नहीं बसों की संख्या

परिवहन विशेषज्ञ और दिल्ली परिवहन विभाग के पूर्व उपायुक्त डॉ. अनिल छिकारा का कहना है कि राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पहले से ही बसों की कमी से जूझ रही थी। शहर की जरूरत के मुकाबले बसों की संख्या लगभग आधी रह गई है। राजधानी को मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए करीब 11,000 बसों की जरूरत है। इसके बावजूद न तो नई बसें समय पर सड़कों पर आ रही हैं और न ही पुराने बेड़े का नवीनीकरण हो सका है।
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