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Noida News: घुटने की सर्जरी नहीं रोक सकी राह, सुप्रिया ने जीता रजत

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-डिस्कस थ्रो में 51.40 मीटर का किया प्रदर्शन, चार सेंटीमीटर से चूका स्वर्ण

पुनीत कुमार
यमुना सिटी। गांव में लोग कहते थे कि खेलकर क्या मिलेगा। अभ्यास के लिए मैदान नहीं था और घुटने की सर्जरी के कारण खेल से दूर भी रहना पड़ा। इन मुश्किलों के बावजूद जेवर के खाजपुर गांव की सुप्रिया अत्री ने हार नहीं मानी। चेन्नई में आयोजित 41वीं नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने अंडर-20 महिला डिस्कस थ्रो में 51.40 मीटर का प्रदर्शन कर रजत पदक जीता। वह स्वर्ण पदक से महज चार सेंटीमीटर पीछे रह गईं।
सुप्रिया ने बताया कि गांव में मैदान नहीं होने के कारण उन्हें अभ्यास के लिए सरकारी स्कूल के मैदान का सहारा लेना पड़ता था। खेल में आगे बढ़ने के दौरान गांव के लोगों की नकारात्मक बातों का भी सामना करना पड़ा। लोग खेल में समय लगाने को बर्बादी बताते थे, लेकिन उन्होंने इन बातों को अपने लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया और लगातार अभ्यास जारी रखा।
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घुटने की सर्जरी के बाद भी नहीं मानी हार :
सुप्रिया के खेल सफर में चोट भी बड़ी चुनौती बनकर आई। करीब साढ़े तीन साल पहले उनके घुटने में चोट लगी थी, जिसके कारण सर्जरी करानी पड़ी। इसके बाद उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू किया और मेहनत जारी रखी। फिलहाल वह करीब तीन साल से पटियाला में रहकर प्रशिक्षण ले रही हैं।
पिता ने शुरुआत से दिया साथ :
सुप्रिया के पिता निर्मल कुमार सेना से सेवानिवृत्त हैं। सुप्रिया ने बताया कि उनके पिता ने शुरुआत में प्रशिक्षण दिलाने में मदद की और आज भी घर आने पर अभ्यास कराते हैं। परिवार का सहयोग उनके खेल सफर में अहम रहा है।
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पिछले साल सुप्रिया ने 48.15 मीटर का थ्रो कर रजत पदक जीता था। इस बार उन्होंने अपने प्रदर्शन में 3.25 मीटर का सुधार करते हुए 51.40 मीटर की दूरी हासिल की। प्रतियोगिता में पंजाब की अमानत कंबोज ने 51.44 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। सुप्रिया का प्रदर्शन उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।
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