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Noida News: खदरा की रामलीला... सेवा, श्रद्धा और समर्पण की 59 साल पुरानी परंपरा

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खदरा रामलीला के कलाकार मंचन करते हुए। स्रोत ः स्वयं
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लखनऊ। खदरा में श्री जनता रामलीला की स्थापना 1966 में हुई थी। तब से यहां लगातार रामलीला का मंचन होता आ रहा है। खास बात यह है कि इस रामलीला के मंचन से जुड़े सभी कलाकार बिना किसी पारिश्रमिक के रामायण के पात्रों का किरदार निभाते हैं। कोई नौकरीपेशा है तो किसी का अपना व्यवसाय है। हर साल सभी रिहर्सल से लेकर मंचन तक पूरी तरह से समर्पित हो जाते हैं। इन कलाकारों का कहना है कि वे धन के लिए नहीं बल्कि मन की संतुष्टि के लिए मंचन से जुड़ते हैं। प्रभु राम के प्रति अगाध आस्था ही उनसे मंचन कराती है।
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केजीएमयू में पैथोलॉजी में काम करने वाले राम विशाल निषाद रामलीला में जामवंत का पात्र निभाते हैं। वे कहते हैं कि पिछले 15 वर्ष से वे मंचन से जुड़े हैं। उनका मानना है कि रामलीला हमारी संस्कृति का पर्याय है और इसे जीवंत बनाए रखने के साथ ही अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का दायित्व हम सभी का है। इसी तरह से दीपू पांडेय 30 वर्ष से अहिरावण का किरदार निभा रहे हैं।

पेंटिंग का काम करने वाले अभिषेक अस्थाना 20 वर्ष से सुग्रीव बनते आ रहे हैं। हलवाई का काम करने वाले सक्षम गुप्ता कुंभकर्ण बनते हैं। इसके अलावा ऋषभ गुप्ता 10 वर्ष से बाली, विनोद मोहन निषाद 20 वर्ष से विभीषण, राहुल मिश्रा 10 वर्ष से मेघनाद, संदीप अचल निषाद लक्ष्मण, विपुल मिश्रा 20 वर्ष से रावण, सोनू मिश्रा व शोभित गुप्ता रावण, अजय कनौजिया राजा जनक, विनोद मोहन निषाद विभीषण, अभिषेक यादव अंगद, अमन यादव 15 वर्ष से काली जी और संदीप शुक्ल कैकेयी का कई वर्षों से अभिनय करते चले आ रहे हैं।
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30 वर्षों से निभा रहे जिम्मेदारी
खदरा की रामलीला के निर्देशन की जिम्मेदारी रामनाथ निषाद, पवन तिवारी और राम मोहन निषाद पिछले 30 वर्षों से निभा रहे हैं। कलाकारों की साज-सज्जा का काम हरि श्याम रस्तोगी करते हैं। श्री जनता रामलीला कमेटी के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने बताया कि हमारे यहां कोई भी कलाकार अभिनय के एवज में कोई पारिश्रमिक नहीं लेता है। सभी प्रभु राम के भक्त हैं और स्वेच्छा से स्वांत: सुखाय की भावना से हर वर्ष अपना योगदान लगातार देते आ रहे हैं।

खदरा रामलीला के कलाकार मंचन करते हुए। स्रोत ः स्वयं

खदरा रामलीला के कलाकार मंचन करते हुए। स्रोत ः स्वयं

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