सार
बुधवार को गलगोटिया विश्वविद्यालय में आयोजित अध्यात्मिक सत्र में शामिल होने पहुंचीं अध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी ने अमर उजाला को दिए साक्षात्कार में कहा कि जब अभिभावक स्वयं ही अपनी राह से भटके हों, तो वे जेन जी के युवाओं को सही दिशा कैसे दिखा सकते हैं।
यमुना सिटी। स्वयं राह भटके हुए अभिभावक कैसे युवाओं (जेन जी) को राह दिखा सकते हैं। जेन जी को अपनी राह पर चलने दें। परिवार स्वयं अध्यात्म और शांति की राह पर चलें, जिसे जेन जी अपनाएगा। माता-पिता जिस रास्ते चलेंगे उसी ओर युवा चलेंगे। यह बात बुधवार को गलगोटिया विश्वविद्यालय में अध्यात्मिक सत्र को संबोधित करने आईं अध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी ने अमर उजाला को दिए एक साक्षात्कार में कही।
जया किशोरी ने बताया कि छह वर्ष से ही उन्होंने कथा कहना शुरू कर दिया था। घर में धार्मिक माहौल था। इसी वजह से उनका रुझान कथाओं और शास्त्राें की ओर था। जैसे युवाओं का रुझान अध्यात्म की ओर जाता है, वही रुझान उन्हें भी मोटिवेशनल सेशन की ओर लेकर गया।
साक्षात्कार में जया किशोरी ने बताया कि अध्यात्म भी एक रास्ता है जो मन की शांति की ओर ले जाता है। अध्यात्म चाहे ध्यान के रूप में हो या नाम जप के रूप में हो। लोग अपने तरीके से उन रास्ते को चुन सकते हैं जो उन्हें शांति, सुकून, समझदारी और धैर्य की ओर ले जा सकता है। यही रास्ता चाहिए होता है जहां लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में कठिनाइयों के बीच स्वयं को शांतचित्त और स्थित रख सकते हैं।
जेन जी को नियम-कानून में मत बांधें अपनी तरह से अध्यात्म की ओर लाएं : अध्यात्मिक मोटिवेशिनल वक्ता जया किशोरी ने जेन जी के बारे में बताया कि युवाओं को नियम-कानून में बांधकर अध्यात्म की ओर नहीं लाया जा सकता है। वह स्वयं अपनी मर्जी से ही इस ओर मुड़ी। इसके लिए घर-परिवार का माहौल उन्हें मिला। इसी तरह से माता-पिता भी यदि मोबाइल, टीवी में अपने को न उलझाकर स्वयं अध्यात्म की ओर जाएंगे तो युवा मन जरूर उसी राह पर अपने आप आ जाएगा।
विश्व का कल्याण भी शांति में है: विश्वभर में चल रहे अशांति के माहौल पर जया किशोरी का कहना है कि भारतीय सनातनी परंपरा जहां विश्व कल्याण और विश्व शांति की बात करती है। ऐसे में विश्व का कल्याण भी शांति में ही निहित है।