उधमपुर। शहर के दो प्रमुख अंतरराज्यीय मार्ग पुराना राजमार्ग और धार रोड इन दिनों बदहाली की मार झेल रहे हैं। शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले ये दोनों रास्ते शहर की सीमा के भीतर जगह-जगह गड्ढों से पटे पड़े हैं। इसके चलते न केवल यात्री बल्कि स्थानीय वाहन चालक और आम शहरवासी भी भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
स्थानीय राजवीर सिंह, विनय कुमार, गोकुल शर्मा, यशपाल शर्मा व अन्य शहरवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार विभाग से सड़क की मरम्मत की मांग की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ अस्थायी पैचवर्क से कुछ दिन राहत मिलती है, लेकिन कुछ ही समय बाद सड़क फिर उसी हालत में लौट आती है। इनकी बदहाली शहर की सुंदरता भी बिगाड़ रही है।
नया राजमार्ग बनने के बाद पुराना राजमार्ग झेल रह उपेक्षा की मार
नया राजमार्ग बनने के बाद पुराने राजमार्ग की स्थिति जीर्ण-शीर्ण बनी हुई है। खासतौर पर कैपरी से लेकर जखैनी तक के हिस्से पर इस अति महत्वपूर्ण सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं, जिनमें हल्की सी बारिश होते ही पानी भर जाता है। जल निकासी के लिए इसके किनारे नालियों का भी उचित प्रबंध नहीं है। इस रास्ते से जम्मू-श्रीनगर के बीच सफर करने वाले यात्रियों के अलावा गढ़ी-रेहम्बल, मलाड़, जिब, चक चोपड़ा शॉप, मगैनी, क्रिमची मानसर, टी मोड़, ओमाड़ा आदि कई दर्जन इलाकों के हजारों लोग रोजाना जिला मुख्यालय तक आवाजाही करते हैं।
कल्लर से लेकर सत्तैनी तक धार रोड भी है बदहाल
इसी तरह, शहर का दूसरा महत्वपूर्ण रास्ता धार रोड भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। शहर की सीमा में यह सत्तैनी से लेकर कल्लर तक काफी बदहाल हो चुका है। कई स्थानों पर रोड की परत उखड़ चुकी है और लगातार बढ़ते वाहन दबाव के कारण गड्ढे और गहरे होते जा रहे हैं। खासकर मियां बाग और इंडस्ट्रीज एरिया के पास इसकी हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है। किनारे पर जल निकासी का भी कोई साधन नहीं हैं जिससे बारिश के दौरान समस्या काफी गंभीर हो जाती है। धार रोड शहर के दोमेल चौक से शुरू होकर आगे रौन-दोमेल, जगानू, मनवाल, किशनपुर, बट्टल, मानसर से होते हुए जिला सांबा से जुड़ता है। इसलिए इस पर भी रोजाना हजारों की संख्या में वाहनों की आवाजाही का दबाव बना रहता है।
दोनों सड़कें हैं शहर की मुख्य लाइफलाइन
यह दोनों सड़कें उधमपुर की लाइफलाइन है और यह शहर का मुख्य प्रवेश द्वार भी मानी जाती हैं। शहर के भीतर इन दोनों सड़कों पर गड्ढों की भरमार न सिर्फ रोजाना जिला मुख्यालय तक की आवाजाही करने वालों के लिए परेशानी का कारक है बल्कि इससे शहरवासी भी परेशान हैं। आसपास के इलाकों से स्कूल आने-जाने वाले बच्चों और अस्पताल जाने वाले मरीजों को भी अतिरिक्त समय लग रहा है। इसके अलावा शहर का कारोबार भी इससे प्रभावित होता है। सामान लाने-ले जाने में अतिरिक्त समय और खर्च लग रहा है, जिससे उनकी रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।
कोटयह सड़कें बीआरओ (ग्रेफ) के अधीन हैं और बीआरओ के सीईओ के साथ पहले भी इस मामले पर चर्चा की गई है। लिखित में भी प्रस्ताव भेजा गया गया है। चूंकि बीआरओ ग्रेफ, उत्तरी कमान के अधीन है तो अब जल्द ही आर्मी कमांडर के साथ बैठक कर भी इस मामले को उठाया जाएगा, क्योंकि यह सड़कें शहर का मुख्य चेहरा हैं और इनकी मरम्मत बहुत जरूरी है।
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पवन कुमार गुप्ता, विधायक