उधमपुर। राजकीय महिला काॅलेज में संस्कृत, हिंदी और उर्दू का भाषाई संबंध विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। इसके समापन समारोह में चिनैनी-घोरडी के विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि संस्कृत, हिंदी और उर्दू का रिश्ता सिर्फ़ अकादमिक नहीं है, यह एक साझा सभ्यता की कहानी है।
संस्कृत हमारी प्राचीन नींव है, हिंदी इसका स्वाभाविक विकास है और उर्दू सांस्कृतिक संगम का एक अद्भुत उदाहरण है। ये भाषाएं मिलकर भारत की साझी पहचान का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहां ज्ञान, काव्य और संस्कृति सदियों से एक साथ प्रवाहित होती रही हैं।
विधायक ने छात्रों की तरफ से प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की भी हार्दिक सराहना की। कहा कि आज प्रदर्शित डोगरा गीतडू, कश्मीरी नृत्य, गोजरी लोकगीत और डोगरी लोकनृत्य केवल प्रस्तुतियां नहीं थीं, बल्कि वे जम्मू-कश्मीर की आत्मा का प्रतिबिंब थीं। उन्होंने बताया कि हमारा क्षेत्र सांस्कृतिक समृद्धि से भरपूर है और युवा छात्रों को इस विरासत को संरक्षित और मनाते देखकर मुझे गर्व होता है।
काॅलेज प्राचार्य डॉ. नलिनी पठानिया ने कहा कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के पिछले दो दिनों में हमने सार्थक चर्चाएं, विद्वानों के बीच संवाद और प्रेरक सांस्कृतिक चिंतन देखा है, जो सभी ''''संस्कृत, हिंदी और उर्दू का भाषाई संबंध, प्राचीन जड़ों से आधुनिक विचलन तक'''' विषय पर केंद्रित थे। उन्होंने कहा कि महिला कॉलेज उधमपुर में हमें ज्ञान, संस्कृति और नवाचार के बीच सेतु का निर्माण करने वाली शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन करने पर गर्व है।
संगोष्ठी में दो शैक्षणिक सत्र आयोजित किए गए। प्रातःकालीन तकनीकी सत्र में विभिन्न संस्थानों के विद्वानों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस सत्र की अध्यक्षता जम्मू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. राम बहादुर और जेएनयू में उर्दू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. परवेज़ अहमद ने की। शोध-पत्र प्रस्तुतियों के बाद संगीत विभाग के छात्रों ने जम्मू और कश्मीर की समृद्ध विरासत को दर्शाते हुए एक जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों में पूजा एवं समूह द्वारा डोगरा गीतडू नृत्य, हर्षिता एवं समूह द्वारा कश्मीरी नृत्य, नसीम अख्तर एवं समूह द्वारा गोजरी लोकगीत और श्रुति-महक एवं समूह द्वारा डोगरी लोकनृत्य शामिल था।
समारोह के दौरान मुख्य अतिथि ने शोध-पत्र प्रस्तुतकर्ताओं और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए और शैक्षणिक विमर्श में उनके योगदान की सराहना की। इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा संकाय सदस्य, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र भी उपस्थित थे।