नई दिल्ली। अदालत ने सुविधाएं देने के मामले में कैदियों में भेदभाव करने पर तिहाड़ जेल प्रशासन को फटकार लगाते हुए महानिदेशक से जवाब मांगा है। अदालत ने एंबियंस ग्रुप के प्रमोटर राज सिंह गहलोत के खिलाफ मामले की सुनवाई के दौरान गौर किया कि वह सुनवाई को हेडफोन लगाकर बेहद गंभीरता से सुन रहा था।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब 800 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में राज सिंह गहलोत व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। एजेंसी ने इन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया है।
पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने पांच अक्तूबर को सुनवाई करते हुए कहा कि कैदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान हेडफोन मुहैया करवाना एक स्वागत योग्य कदम है। हालांकि दुर्भाग्यवश ऐसी सुविधा और विशेषाधिकार अन्य कैदियों के मामले में जेल प्रशासन द्वारा नहीं दिया जाता।
उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि सरकार जो सुविधा गहलोत को दे रही है, वह अन्य कैदियों को न देकर उनसे भेदभाव नहीं कर सकती। अन्य कैदी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान ऐसे हेडफोन के जरिये भागीदारी के हकदार हैं।
अदालत ने जेल महानिदेशक को इस मामले को देखने और ये बताने के लिए कहा है कि इसी तरह की सुविधा उन अन्य कैदियों को क्यों नहीं दी जा रही जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई में शामिल होते हैं।
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान ईडी के आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए कई आरोपियों को समन जारी कर किया है। ईडी के अनुसार गहलोत के खिलाफ जम्मू भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो की 2019 की एफआईआर के आधार पर धन शोधन का मुकदमा दर्ज किया गया था।
जम्मू भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो ने दिल्ली के यमुना खेल परिसर के नजदीक पांच सितारा लीला एंबियंस कन्वेंशन होटल के निर्माण एवं विकास में कथित धन शोधन के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी।